बिग ब्रेकिंग: गेस्ट फैकल्टी की पुनर्नियुक्ति पर हाईकोर्ट सख्त, अल्मोड़ा विश्वविद्यालय से मांगा जवाब

गेस्ट फैकल्टी की पुनर्नियुक्ति पर हाईकोर्ट सख्त, अल्मोड़ा विश्वविद्यालय से मांगा जवाब

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अल्मोड़ा विश्वविद्यालय के विधि संकाय में गेस्ट फैकल्टी की पुनर्नियुक्ति न किए जाने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने विश्वविद्यालय से जवाब तलब करते हुए अगली सुनवाई 1 अप्रैल तय की है।

इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में हुई।

पुनर्नियुक्ति से इनकार पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी

विधि संकाय की गेस्ट टीचर प्रियंका ने अपनी पुनर्नियुक्ति न होने और विभागाध्यक्ष द्वारा की गई कार्रवाई को चुनौती दी है। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना कि विभागाध्यक्ष द्वारा पुनः नियुक्ति से इनकार करना भेदभावपूर्ण, दुर्भावनापूर्ण और प्रतिशोधात्मक प्रतीत होता है।

आईसीसी में गवाह बनने का आरोप

याचिकाकर्ता के अनुसार, वह विभागाध्यक्ष के खिलाफ आंतरिक शिकायत समिति (ICC) के समक्ष गवाह थीं। समिति ने विभागाध्यक्ष के खिलाफ प्रतिकूल रिपोर्ट भी दी थी, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

प्रियंका का आरोप है कि इसके बाद उन्हें प्रताड़ित किया गया। पहले उन्हें कार्यभार ग्रहण करने की अनुमति नहीं दी गई और बाद में नियमित रूप से ड्यूटी पर न आने के मनगढ़ंत आरोप लगाकर उनका वजीफा और पारिश्रमिक भी रोक दिया गया।

विश्वविद्यालय ने मांगा समय

सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय के अधिवक्ता ने विभागाध्यक्ष के खिलाफ चल रही जांच की स्थिति पर निर्देश लेने के लिए दो दिन का समय मांगा। साथ ही कोर्ट को आश्वस्त किया कि पूर्व में दिए गए आदेशों का पालन किया जाएगा।

इस पर कोर्ट ने विश्वविद्यालय को समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई 1 अप्रैल निर्धारित कर दी है।

अहम संकेत

मामले में हाईकोर्ट की सख्ती से साफ है कि शिक्षण संस्थानों में संविदा और अतिथि शिक्षकों के अधिकारों को लेकर न्यायपालिका गंभीर है। आने वाली सुनवाई में विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका और विभागाध्यक्ष पर कार्रवाई को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।