खनन से पहले जांच अनिवार्य। हाईकोर्ट ने जिला खान अधिकारी को सौंपी जिम्मेदारी
नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने बागेश्वर जिले में खड़िया (सोपस्टोन) के अनियंत्रित खनन से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि किसी भी खनन ऑपरेटर को अनुमति देने से पहले उसके दावों का सत्यापन अनिवार्य होगा।
अदालत ने कहा कि जिन खनन संचालकों के पास वैध पट्टे और संचालन की अनुमति है तथा जिन्होंने सभी नियमों का पालन किया है, उन्हें राहत दी जा सकती है। हालांकि, इसके लिए जिला खान अधिकारी द्वारा प्रत्येक मामले की विस्तृत जांच जरूरी होगी।
दरअसल, हाईकोर्ट ने बागेश्वर के ग्रामीणों की शिकायत पर स्वतः संज्ञान लेते हुए अवैध खनन के खिलाफ जनहित याचिका दर्ज की थी। 6 जनवरी 2025 को सभी खनन कार्यों पर रोक लगाई गई थी और 9 जनवरी को मशीनें जब्त करने के आदेश दिए गए थे।
इसके बाद कई ऑपरेटरों ने अदालत में हस्तक्षेप कर दावा किया कि वे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों का पालन कर रहे हैं और उनके पास वैध दस्तावेज मौजूद हैं।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों का भी हवाला दिया गया, जिसमें कहा गया था कि खनन पर पूर्ण प्रतिबंध से राज्य की अर्थव्यवस्था और स्थानीय लोगों की आजीविका प्रभावित होती है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए वैध ऑपरेटरों को राहत के संकेत दिए।
न्यायालय ने जिला खान अधिकारी नाजिया हसन को निर्देश दिया कि वे सभी दावों का व्यक्तिगत स्तर पर सत्यापन करें।
साथ ही, पर्यावरणीय नियमों के पालन की जांच के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव को एक सप्ताह के भीतर क्षेत्रीय अधिकारी नामित करने को कहा गया है।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि खनन संचालक दो सप्ताह के भीतर अपने दावे प्रस्तुत करें, जिनकी जांच अगले दो हफ्तों में पूरी कर रिपोर्ट अदालत में दाखिल की जाएगी।
सुनवाई के दौरान स्टोन क्रशर संचालकों ने भी अपनी समस्या रखी, जिस पर कोर्ट ने साफ किया कि यह जनहित याचिका केवल बागेश्वर में सोपस्टोन खनन तक सीमित है और इसका स्टोन क्रशर संचालन से कोई संबंध नहीं है।
अदालत ने कहा कि यदि किसी भी इकाई में अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित अधिकारी कानून के तहत कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होंगे।
मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है, जिसमें संयुक्त रिपोर्ट हलफनामे के साथ प्रस्तुत की जाएगी।



