वन अधिकारी मारपीट और IPS प्रतिनियुक्ति पर हाईकोर्ट की सख्त। जवाब-तलब सरकार
नैनीताल। Uttarakhand High Court में मंगलवार को दो अहम मामलों पर सुनवाई हुई। एक मामले में आईजी स्तर के दो आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई, जबकि दूसरे मामले में विकासनगर के वन अधिकारी के खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग से जुड़ी याचिका पर अदालत ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है।
आईपीएस अधिकारियों की डेपुटेशन मामले में 18 मार्च तक मांगा जवाब
आईजी पद पर तैनात आईपीएस अधिकारी Neeru Garg और Arun Mohan Joshi को प्रतिनियुक्ति पर केंद्र सरकार के अधीन भेजने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर हाईकोर्ट में विस्तृत सुनवाई हुई।
सुनवाई के बाद खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 मार्च की तिथि तय करते हुए केंद्र और राज्य सरकार से तब तक जवाब दाखिल करने को कहा है।
दरअसल, वर्ष 2005 बैच की आईपीएस अधिकारी नीरू गर्ग को Indo‑Tibetan Border Police में उप महानिरीक्षक (DIG) के पद पर और वर्ष 2006 बैच के आईपीएस अधिकारी अरुण मोहन जोशी को Border Security Force में डीआईजी के पद पर प्रतिनियुक्ति पर भेजने का आदेश Ministry of Home Affairs ने 5 मार्च 2026 को जारी किया था।
इसके बाद Government of Uttarakhand ने 6 मार्च 2026 को दोनों अधिकारियों को कार्यमुक्त करने का आदेश जारी किया। इस आदेश को दोनों अधिकारियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार से पूछा कि इस रैंक के अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर भेजने के कितने पद हैं और कितने पद स्थायी हैं।
जवाब में बताया गया कि ऐसे 16 पद हैं जिन्हें प्रतिनियुक्ति के आधार पर केंद्र सरकार में भेजा जा सकता है, जबकि शेष पद राज्य सरकार के अधीन रहते हैं।
विकासनगर वन अधिकारी प्रकरण में भी सरकार से मांगा जवाब
इसी दिन Vikasnagar के उप प्रभागीय वनाधिकारी (SDO) Rajeev Nayan Nautiyal के खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने से संबंधित याचिका पर भी सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई Justice Rakesh Thapliyal की एकल पीठ में हुई।
कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि जिस स्थान पर यह घटना हुई, क्या वह क्षेत्र खनन के लिए प्रतिबंधित था या नहीं। इस संबंध में सरकार को अगले सोमवार तक स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं।
कोर्ट की कार्यवाही के वायरल वीडियो पर भी सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पर कोर्ट की कार्यवाही के वायरल हो रहे वीडियो पर भी सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने कहा कि लाइव स्ट्रीमिंग की सुविधा आम जनता तक न्याय की पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से दी गई है, लेकिन कुछ लोग इसका दुरुपयोग कर न्यायपालिका की गरिमा को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यह Live Streaming of Court Proceedings Rules 2018 के विरुद्ध है और इसके कॉपीराइट उच्च न्यायालय के अधीन हैं। जरूरत पड़ने पर कोर्ट ऐसे मामलों में संज्ञान लेकर कार्रवाई भी कर सकता है।
क्या है विकासनगर मारपीट का मामला
दरअसल, फरवरी के अंत में **Dehradun जिले के विकासनगर क्षेत्र में वन अधिकारियों के साथ मारपीट की घटना सामने आई थी, जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।
आरोप है कि 27 फरवरी की शाम एसडीओ वन राजीव नयन नौटियाल जब अपने कार्यालय से लौट रहे थे, तब उन्होंने Yamuna River की ओर जा रहे एक डंपर की संदिग्ध गतिविधि का वीडियो बनाया। इस पर वहां मौजूद कुछ लोगों ने विरोध करते हुए उनके साथ हाथापाई की और शासकीय कार्य में बाधा डाली।
इस मामले में दोनों पक्षों की शिकायत पर पुलिस ने अलग-अलग मुकदमे दर्ज कर जांच शुरू की है। सुनवाई के दौरान न्यायालय को वह वीडियो भी दिखाया गया, जिसमें वन अधिकारी को वाहन से बाहर निकालकर मारपीट करते हुए देखा जा रहा है।



