चोरी की स्कूटी पर घूमता रहा चोर। चार चालान कटे, पुलिस अब भी बेखबर
रिपोर्ट- राजकुमार धीमान
देहरादून की ‘मित्र पुलिस’ की मित्रता अब अनजाने में चोरों पर भी मेहरबान होती दिख रही है। हालात ऐसे हैं कि चोरी की स्कूटी पर चोर शहर में बेखौफ घूम रहा है, ट्रैफिक नियम तोड़ रहा है, कैमरों में कैद हो रहा है। लेकिन पुलिस की गिरफ्त से अब भी दूर है।
विडंबना देखिए, चोर ने यातायात नियमों के उल्लंघन पर एक-दो नहीं बल्कि पूरे चार चालान कटवा लिए। चालान के साथ उसकी तस्वीर भी साफ तौर पर कैद हो चुकी है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर अब तक सन्नाटा पसरा है। मानो पुलिस इस इंतजार में हो कि चोर अपनी सैर पूरी कर खुद ही स्कूटी लौटाने आ जाएगा।
14 नवंबर को हुई थी चोरी
यह मामला अजबपुर खुर्द स्थित सरस्वती विहार निवासी नितिन सिलवाल की स्कूटी से जुड़ा है। 14 नवंबर 2025 की रात उनके घर के बाहर से स्कूटी चोरी हो गई थी। उन्होंने तुरंत थाना नेहरू कॉलोनी में रिपोर्ट दर्ज कराई।
समय बीतता गया, लेकिन स्कूटी की बरामदगी तो दूर, ठोस कार्रवाई के संकेत भी नजर नहीं आए। निराश होकर नितिन ने जनवरी 2026 में थानाध्यक्ष को पत्र लिखकर मामले में तेजी लाने की गुहार भी लगाई।
26 फरवरी को एक साथ चार चालान
जहां पुलिस की जांच ठंडी पड़ी रही, वहीं चोर ने खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाईं। 26 फरवरी को उसने एक साथ चार ट्रैफिक चालान कटवा लिए।
ये चालान निम्न उल्लंघनों पर काटे गए
- बिना हेलमेट वाहन चलाना
- मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाना
- यातायात अधिकारी के निर्देशों की अवहेलना
- प्रदूषण मानकों का उल्लंघन
ट्रैफिक अधिकारी प्रज्ञा पंत द्वारा कुल 6500 रुपये का जुर्माना आरोपित किया गया। चालान की प्रति में वाहन चालक की तस्वीर भी स्पष्ट दिखाई दे रही है।
सवालों के घेरे में ‘मित्र पुलिस’
अब सवाल यह है कि जब चोरी की रिपोर्ट पहले से दर्ज है और चालान के साथ चालक का फोटो भी उपलब्ध है, तो फिर आरोपी तक पहुंचने में देरी क्यों?
- क्या चोरी की सूचना और ट्रैफिक डाटा के बीच कोई समन्वय नहीं है?
- क्या सीसीटीवी और ई-चालान व्यवस्था सिर्फ राजस्व वसूली तक सीमित है?
नितिन को अभी तक अपनी स्कूटी तो नहीं मिल पाई, लेकिन चालानों के रूप में चोर की ‘गतिविधियों’ का लेखा-जोखा जरूर मिल गया है।
अब उम्मीद की जानी चाहिए कि देहरादून की मित्र पुलिस इस ‘बिना नाम वाले चेहरे’ की पहचान कर जल्द कार्रवाई करेगी, ताकि यह मामला सिर्फ विडंबना बनकर न रह जाए, बल्कि कानून के अमल की मिसाल बने।



