टारगेटेड ट्रांसफर पर सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप, प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज का दर्जा सुरक्षित
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज दिनेश कुमार गुप्ता को बड़ी राहत देते हुए उनके मूल रैंक, वेतन और प्रशासनिक दर्जे की रक्षा करने के निर्देश दिए हैं।
वर्ष 2021 से अब तक सात बार ट्रांसफर का सामना कर चुके जज गुप्ता ने कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि उन्हें टारगेट किया जा रहा है और लागू ट्रांसफर पॉलिसी का उल्लंघन किया गया है।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने इस मामले में स्पष्ट किया कि जज गुप्ता को लेबर कोर्ट-कम-इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल में तैनाती दिए जाने के बावजूद उनका प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज का दर्जा प्रभावित नहीं होगा।
कोर्ट ने दिए तीन अहम निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा
- याचिकाकर्ता का मूल रैंक प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज का ही रहेगा।
- लेबर कोर्ट-कम-इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल में तैनाती के दौरान भी उन्हें प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज को मिलने वाले सभी भत्ते मिलेंगे।
- याचिकाकर्ता किसी भी जूनियर या डिस्ट्रिक्ट जज को रिपोर्ट नहीं करेगा। उनका प्रशासनिक नियंत्रण सीधे संबंधित सेशंस डिवीजन के प्रशासनिक/पोर्टफोलियो जज के पास रहेगा।
रैंक और कद को लेकर जताई गई थी आपत्ति
सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेश के बाद राजस्थान हाई कोर्ट ने जज गुप्ता को जयपुर मेट्रोपॉलिटन स्थित लेबर कोर्ट-कम-इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल का पीठासीन अधिकारी नियुक्त किया था।
हालांकि, याचिकाकर्ता ने आशंका जताई थी कि यह पोस्टिंग उनके प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज के कद और प्रशासनिक स्थिति के अनुरूप नहीं है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश देकर उनकी आशंकाओं को दूर किया।
राजस्थान हाईकोर्ट ने निर्देश किए स्वीकार
राजस्थान हाई कोर्ट द्वारा सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को स्वीकार किए जाने के बाद मामले में दायर आवेदन का निपटारा कर दिया गया।



