3.30 लाख स्मार्ट मीटरों पर सवाल! UPCL ने गुणवत्ता जांच से पहले रोक लगाई
रिपोर्ट- राजकुमार धीमान
देहरादून। बिजली के स्मार्ट मीटरों पर उत्तराखंड में बढ़ते विवाद के बीच ऊर्जा निगम ने चौंकाने वाला कदम उठाते हुए प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगाने के सभी कार्य तत्काल प्रभाव से रोक दिए हैं।
महीनों से सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक जिस आक्रोश की आवाज़ उठ रही थी, अब उस पर उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL) ने अपनी मुहर लगा दी है।
3.30 लाख स्मार्ट मीटर लग चुके, अब सवाल और गहरे
प्रदेश में अब तक 3.30 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, और अब जब निगम ने तकनीकी खामियों को स्वीकारा है, तो सवाल उठ रहा है—
- क्या ये मीटर बिना पर्याप्त परीक्षण के लगाए गए?
- क्या ठेकेदारों की जिम्मेदारी तय की गई थी?
- लाखों उपभोक्ताओं को बढ़े हुए बिल किसकी लापरवाही से मिले?
UPCL का स्वीकार: ‘गलती मीटर में भी हो सकती है’
निगम के नए आदेश में साफ कहा गया है कि स्मार्ट मीटरों से जुड़ी बड़ी संख्या में शिकायतें सामने आई हैं। इसी के चलते UPCL के प्रबंध निदेशक अनिल यादव ने निर्देश जारी किए हैं कि:
- जहां तकनीकी खामियां या गलत रीडिंग की शिकायत है, वहां मीटर जस का तस नहीं चलेंगे,बल्कि बदले जाएंगे।
मुख्य अभियंता बीएमएस परमार द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि:
- सभी शिकायतों की गंभीर तकनीकी जांच होगी।
- उपभोक्ता की शिकायत सही पाए जाने पर मीटर तत्काल बदला जाएगा।
- फील्ड अधिकारी साइट पर जाकर निस्तारण करेंगे, केवल कागजी जवाब नहीं चलेगा।
उपभोक्ता को महीनों टरकाने वाली व्यवस्था पर सवाल
अब तक बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं को यह कहकर लौटा दिया जाता था कि-
- “मीटर ठीक है, बिल सही है।”
लेकिन UPCL के ताज़ा आदेश ने पहली बार यह स्वीकार किया है कि गड़बड़ी मीटर में भी हो सकती है, और उपभोक्ताओं की शिकायतें निराधार नहीं थीं।
यह आदेश उन लाखों उपभोक्ताओं के लिए राहत का दस्तावेज़ बनकर सामने आया है जिन्हें लगातार भारी-भरकम बिल भुगतने पड़े और शिकायतों के बाद भी समाधान नहीं मिला।
स्मार्ट मीटर परियोजना: ‘सिस्टम’ खुल कर सामने
यह आदेश सिर्फ एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि इस बात की औपचारिक स्वीकारोक्ति है कि:
- स्मार्ट मीटर परियोजना में तकनीकी खामियां थीं,
- गुणवत्ता पर सवाल थे,
- और उपभोक्ताओं की नाराज़गी वाजिब थी।
सिस्टम की कमजोरियां अब उजागर हो चुकी हैं। स्मार्ट मीटर आखिर कितना स्मार्ट था यह अब जांच के केंद्र में है।
उपभोक्ताओं के लिए बड़ा हथियार: लिखित मांग कर सकेंगे तकनीकी जांच
UPCL के आदेश के बाद अब उपभोक्ता:
- मीटर जांच की औपचारिक मांग कर सकते हैं,
- गलत बिल पर स्पष्टीकरण और सुधार मांग सकते हैं और फील्ड अधिकारियों को लिखित आदेश दिखाकर जवाबदेह बना सकते हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल: जिम्मेदारी किसकी?
अब भी कई महत्वपूर्ण सवाल अनुत्तरित हैं-
- गलत मीटर लगाने की जिम्मेदारी किसकी थी?
- क्या ठेकेदारों की मॉनिटरिंग में गड़बड़ थी?
- क्या बिना फील्ड टेस्टिंग के लाखों मीटर लगा दिए गए?
उपभोक्ताओं के अतिरिक्त बिल का नुकसान कौन भरेगा?
प्रदेश में 3.30 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं—ऐसे में अब समीक्षा और जवाबदेही की प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।
आदेश से उम्मीद, अब कार्रवाई पर नज़र
स्मार्ट मीटरों को लेकर सड़क से सोशल मीडिया तक जो सवाल उठ रहे थे, अब UPCL ने खुद उन्हें सही ठहराया है।
लेकिन असल तस्वीर तब बदलेगी जब:
- मीटर बदलने की प्रक्रिया तेज़ी से शुरू होगी,
- फील्ड स्तर पर शिकायतों का समाधान होगा,
- और उपभोक्ताओं को वास्तविक राहत मिलेगी।
फिलहाल यह आदेश उपभोक्ताओं के लिए बड़ी जीत है।
अब इंतज़ार इस बात का है कि क्या यह आदेश केवल कागज़ों तक रहेगा या ज़मीन पर भी लागू होगा।



