सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक। कहा, भाषा नहीं बन सकती योग्यता की कसौटी
नई दिल्ली। उत्तराखंड हाईकोर्ट के उस आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है, जिसमें एक अधिकारी के अंग्रेजी नहीं बोल पाने के आधार पर उसकी योग्यता की जांच कराने का निर्देश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सिर्फ भाषा के आधार पर किसी अधिकारी की कार्यक्षमता पर सवाल नहीं उठाया जा सकता।
यह मामला नैनीताल जिले के बुधलाकोट गांव का है, जहां ग्राम पंचायत चुनाव के दौरान तैनात एक अधिकारी पर यह सवाल उठा कि वह अंग्रेजी नहीं बोल सकते, जबकि चुनाव संबंधी दस्तावेज अंग्रेजी में होते हैं। हाईकोर्ट ने इस आधार पर जांच के आदेश दिए थे कि क्या वह अपने पद की जिम्मेदारियों को ठीक से निभा सकते हैं।
राज्य सरकार पहुंची सुप्रीम कोर्ट: इस आदेश को चुनौती देते हुए राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। सरकार ने दलील दी कि अधिकारी अंग्रेजी पढ़ और समझ सकते हैं, केवल बोलने में कठिनाई है। ऐसे में उनके खिलाफ जांच या अनुशासनात्मक कार्रवाई उचित नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी अधिकारी की योग्यता का मूल्यांकन केवल भाषा आधारित नहीं हो सकता, जब तक वह अपने कर्तव्यों को सही तरीके से निभा रहा हो। अदालत ने कहा कि यह मामला स्थानीय चुनाव से जुड़ा है, किसी बड़े प्रशासनिक पद से नहीं।
भविष्य के लिए अहम नज़ीर
यह फैसला उन अधिकारियों के लिए राहत बनकर आया है जो अंग्रेजी में पारंगत नहीं हैं, लेकिन अपने काम को जिम्मेदारी से निभा रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह निर्णय प्रशासनिक सेवाओं में भाषाई विविधता और समावेशिता को बढ़ावा देने वाला साबित हो सकता है।



