हाईकोर्ट ब्रेकिंग: कैदियों की रिहाई के निर्देश जारी। गिरधारी साहू को गिरफ्तारी से राहत नहीं

कैदियों की रिहाई के निर्देश जारी। गिरधारी साहू को गिरफ्तारी से राहत नहीं

देहरादून। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने दो अलग-अलग महत्वपूर्ण मामलों में सुनवाई करते हुए अहम निर्देश दिए हैं। एक ओर अदालत ने आजीवन कारावास की सजा काट चुके कैदियों की समयपूर्व रिहाई के मामले में मधुमिता शुक्ला हत्याकांड के आरोपी संतोष राय समेत दो कैदियों की रिहाई की प्रक्रिया पूरी करने को कहा है।

वहीं, दूसरी ओर कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू को गिरफ्तारी पर रोक और मुकदमा निरस्त करने की मांग वाली याचिका पर फिलहाल कोई राहत नहीं दी है। अदालत ने सरकार और शिकायतकर्ता से 3 नवंबर तक जवाब दाखिल करने को कहा है।

संतोष राय समेत दो कैदियों की रिहाई की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश

आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदियों की समयपूर्व रिहाई से जुड़े मामले में न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने स्वतः संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका और अन्य कैदियों की याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की।

अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के बावजूद पात्र कैदियों की रिहाई नहीं होने पर पूर्व में राज्य सरकार से जवाब मांगा था।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने काउंटर दाखिल करते हुए कुछ कैदियों की रिहाई से संबंधित सूची अदालत में पेश की। इसके बाद सरकार की ओर से एक और सूची उपलब्ध कराई गई, जिसमें अन्य कैदियों के नाम शामिल थे।

दो कैदियों के मामले में अदालत ने निर्देश दिया कि संबंधित दस्तावेज जेल पहुंचने के बाद उनकी रिहाई की प्रक्रिया पूरी की जाए। इनमें मधुमिता शुक्ला हत्याकांड के आरोपी संतोष राय का नाम भी शामिल है।

यह पूरा मामला उत्तराखंड सरकार की समयपूर्व रिहाई यानी प्रीमैच्योर रिलीज पॉलिसी के क्रियान्वयन से जुड़ा है। याचिका में उन कैदियों की रिहाई का मुद्दा उठाया गया है, जो 14 साल या उससे अधिक समय से जेल में बंद हैं। इनमें कई कैदी 20 से 25 साल तक की सजा काट चुके हैं।

याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि राज्य सरकार की नीति के तहत पात्र कैदियों की समयपूर्व रिहाई के मामलों में नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

आजीवन कारावास का अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक परिस्थिति में कैदी को जीवनभर जेल में ही रहना पड़े। हालांकि, रिहाई का निर्णय संबंधित नीति, पात्रता और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अधीन होगा।

अदालत को बताया गया कि इस संबंध में जुलाई और सितंबर में भी बैठकें हुई थीं। जेल प्रशासन की ओर से समयपूर्व रिहाई के पात्र मामलों में कार्रवाई की जा रही है और चरणबद्ध तरीके से कैदियों को रिहा किया जा रहा है। हालांकि, अब तक कुल कितने कैदियों को रिहा किया गया है, इसका सटीक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

संतोष राय की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनीषा भंडारी ने पैरवी की। उनके साथ अधिवक्ता प्रीतिश आर्या और शाश्वत सिद्धांत ने भी अदालत में पक्ष रखा।

गिरधारी लाल साहू को फिलहाल राहत नहीं, 3 नवंबर तक जवाब तलब

दूसरे मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू की गिरफ्तारी पर रोक लगाने और उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे को निरस्त करने संबंधी याचिका पर सुनवाई की।

न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ ने फिलहाल याचिकाकर्ता को कोई राहत नहीं दी है। अदालत ने राज्य सरकार और शिकायतकर्ता को 3 नवंबर तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

मामले के अनुसार, गिरधारी लाल साहू ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे को निराधार बताया है। याचिका में कहा गया है कि उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप झूठे हैं और उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी शादी वर्ष 2004 में हुई थी और तब से वह अपनी पत्नी के साथ ही रह रहे हैं।

वहीं, दर्ज मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि गिरधारी लाल साहू ने खुद को अविवाहित बताकर शिकायतकर्ता से शादी की, जबकि शादी के समय वह पहले से विवाहित थे।

इसके अलावा उन पर जालसाजी कर शिकायतकर्ता के फर्जी हस्ताक्षर बनाने और उन्हें कई कंपनियों के निदेशक पद से हटाने का आरोप है। शिकायत में जान से मारने की धमकी देने और जातिसूचक अपशब्दों का इस्तेमाल करने के आरोप भी लगाए गए हैं।

याचिकाकर्ता की ओर से यह भी आरोप लगाया गया है कि उनकी पत्नी रेखा आर्या के मंत्री बनने के बाद 210 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति अर्जित की गई।

उन्होंने इस मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग किए जाने का भी उल्लेख किया है। याचिका में दावा किया गया है कि इन परिस्थितियों के चलते उनके खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया।

गिरधारी लाल साहू ने हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर रोक लगाने और उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे को निरस्त करने की मांग की है। हालांकि, अदालत ने फिलहाल कोई अंतरिम राहत नहीं दी और मामले में अगली सुनवाई के लिए 3 नवंबर की तारीख निर्धारित की है।