चारधाम यात्रा में 60 लाख श्रद्धालुओं का रिकॉर्ड, 271 की मौत। केदारनाथ में बर्फबारी, राष्ट्रपति मुर्मू भी आएंगी
देहरादून। उत्तराखंड में चारधाम यात्रा 2026 अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। एक ओर चारों धामों में श्रद्धालुओं की संख्या 60 लाख के पार पहुंचकर नया रिकॉर्ड बना चुकी है, तो दूसरी ओर यात्रियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
21 अक्टूबर की सुबह 10 बजे तक चारों धामों में 271 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। इनमें यात्रा मार्गों पर दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले श्रद्धालु शामिल नहीं हैं।
वहीं, केदारनाथ धाम में बुधवार को हुई हल्की बर्फबारी से ठंड बढ़ गई है। इसी बीच राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के 2 नवंबर को बाबा केदार के दर्शन करने पहुंचने का कार्यक्रम प्रस्तावित है।
उधर, हरिद्वार में गंगनहर की वार्षिक बंदी के बाद गंगा की धारा कम होने से घाटों पर जमा कचरा, पुराने कपड़े और प्लास्टिक सामने आने लगे हैं। इससे गंगा की स्वच्छता और श्रद्धालुओं की जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
इस तरह चारधाम यात्रा के रिकॉर्ड, श्रद्धालुओं की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रपति के प्रस्तावित दौरे के बीच उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे चर्चा में हैं।
चारधाम यात्रा में 60 लाख के पार श्रद्धालु, 271 लोगों की मौत
चारधाम यात्रा 2026 की शुरुआत 19 अप्रैल से हुई थी। शुरुआती दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या अपेक्षाकृत कम रही, लेकिन इसके बाद यात्रा ने रफ्तार पकड़ी और 21 अक्टूबर की सुबह तक दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 60 लाख के पार पहुंच गई। यह चारधाम यात्रा के इतिहास में नया रिकॉर्ड है।
हालांकि, श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के साथ मौतों का आंकड़ा भी चिंता बढ़ा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 21 अक्टूबर की सुबह 10 बजे तक केदारनाथ में 132, बदरीनाथ में 85, यमुनोत्री में 34 और गंगोत्री में 20 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी थी। इस तरह चारों धामों में मृतकों की कुल संख्या 271 हो गई।
चारधाम यात्रा के दौरान ऊंचाई, कम ऑक्सीजन, बदलते मौसम, लंबी पैदल चढ़ाई और शारीरिक थकान के कारण श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हृदय रोग, सांस संबंधी बीमारियों, उच्च रक्तचाप और मधुमेह से पीड़ित लोगों के लिए जोखिम अधिक हो सकता है।
स्वास्थ्य विभाग और यात्रा प्रबंधन की ओर से श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य जांच कराने, पर्याप्त आराम करने और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार यात्रा करने की अपील की जाती रही है।
इसके बावजूद मौतों का बढ़ता आंकड़ा चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता, आपातकालीन सहायता और गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत बताता है।
पिछले वर्षों के आंकड़े भी इस चुनौती की गंभीरता को दर्शाते हैं। वर्ष 2022 में चारधाम यात्रा के दौरान 311 श्रद्धालुओं की मौत दर्ज की गई थी। वर्ष 2023 में 245, वर्ष 2024 में 246 और वर्ष 2025 में 218 मौतें दर्ज की गईं। इस वर्ष 21 अक्टूबर तक 271 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है।
स्वास्थ्य विभाग के सचिव विनय शंकर पांडे के अनुसार, चारों धामों में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर किया गया है। केदारनाथ और बदरीनाथ जैसे धामों में अस्पताल संचालित हैं और विभिन्न स्थानों पर स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती की गई है।
उन्होंने कहा कि मृतकों में हृदय रोग से पीड़ित श्रद्धालुओं की संख्या अधिक रही है और यात्रियों को यात्रा से पहले स्वास्थ्य जांच कराने की सलाह दी जाती है।
गंगनहर बंदी के बाद गंगा में दिखा कचरा, स्वच्छता पर सवाल
हरिद्वार में गंगनहर की वार्षिक बंदी के बाद गंगा के घाटों पर जगह-जगह पुराने कपड़े, प्लास्टिक और पॉलीथीन दिखाई देने लगी हैं। पानी कम होने से नदी की सतह और रेलिंग के आसपास जमा कचरा सामने आ रहा है। इससे गंगा की स्वच्छता के साथ जलीय जीवों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर भी चिंता बढ़ी है।
हर साल दशहरे से दिवाली तक गंगनहर का पानी बंद किया जाता है। इस अवधि में नदी और नहर की सफाई तथा रखरखाव से जुड़े कार्य किए जाते हैं। लेकिन इस बार बंदी के शुरुआती दौर में ही घाटों पर दिखाई दे रही गंदगी ने श्रद्धालुओं की जिम्मेदारी और नदी संरक्षण को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नारायणी शिला मंदिर के मुख्य पुजारी और ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज त्रिपाठी ने श्रद्धालुओं से गंगा में पुराने कपड़े, प्लास्टिक, पॉलीथीन और अन्य प्रदूषण फैलाने वाली सामग्री नहीं डालने की अपील की है। उन्होंने कहा कि गंगा करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और इसकी पवित्रता बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने धार्मिक परंपराओं के नाम पर नदी को प्रदूषित करने वाली गतिविधियों से बचने की सलाह देते हुए कहा कि गंगा में कचरा डालने से पुण्य नहीं मिलता। श्रद्धालुओं को पूजा सामग्री और पुराने वस्त्र निर्धारित स्थानों पर ही छोड़ने चाहिए।
वहीं, हरिद्वार के मुख्य विकास अधिकारी ललित नारायण मिश्र ने बताया कि गंगनहर बंदी के बाद स्वच्छता अभियान शुरू कर दिया गया है। इसमें सामाजिक संस्थाओं की भागीदारी भी सुनिश्चित की जा रही है।
उन्होंने कहा कि गंगा को साफ रखना केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि आम लोगों को भी इसमें सहयोग करना होगा।
केदारनाथ में बर्फबारी से बढ़ी ठंड, 17.84 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
रुद्रप्रयाग जिले में स्थित केदारनाथ धाम में बुधवार दोपहर बाद हल्की बर्फबारी हुई। बर्फ के फाहे गिरने से केदारपुरी में ठंड बढ़ गई और शाम होते-होते तापमान में गिरावट के कारण ठिठुरन भी बढ़ गई।
बर्फबारी के बीच धाम पहुंचे श्रद्धालुओं ने बर्फ से ढकी पहाड़ियों और आसपास की वादियों का आनंद लिया। हालांकि, मौसम में तेजी से हो रहे बदलाव को देखते हुए प्रशासन ने यात्रियों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।
इस वर्ष अब तक 17,84,660 श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन कर चुके हैं। केदारनाथ मंदिर के कपाट 11 नवंबर को सुबह 8:30 बजे शीतकाल के लिए बंद किए जाने हैं। ऐसे में यात्रा अपने अंतिम चरण में है, लेकिन श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी है।
रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी विशाल मिश्रा के अनुसार, पिछले एक सप्ताह से मौसम अनुकूल रहने के कारण यात्रा व्यवस्थाएं सामान्य बनी हुई हैं। हेली सेवाओं का संचालन भी सुचारू रूप से किया जा रहा है।
उन्होंने यात्रियों से मौसम की ताजा जानकारी लेकर यात्रा पर निकलने, पर्याप्त गर्म कपड़े रखने और अपनी जरूरत के अनुसार दवाइयां साथ रखने की अपील की है। प्रशासन का कहना है कि कपाट बंद होने तक श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाएगी
2 नवंबर को बाबा केदार के दर्शन करेंगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
चारधाम यात्रा के अंतिम चरण के बीच राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के केदारनाथ धाम पहुंचने का कार्यक्रम प्रस्तावित है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, राष्ट्रपति 1 नवंबर को शाम करीब 4:45 बजे जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंचेंगी। इसके बाद वह देहरादून स्थित लोक भवन जाएंगी, जहां रात्रि विश्राम का कार्यक्रम है।
अगले दिन 2 नवंबर को राष्ट्रपति हेलीकॉप्टर से केदारनाथ धाम पहुंचकर बाबा केदार के दर्शन और पूजा-अर्चना करेंगी। इसके बाद उनके जौलीग्रांट एयरपोर्ट लौटने और वहां से दिल्ली रवाना होने का कार्यक्रम है। यह दौरा निजी बताया जा रहा है।
राष्ट्रपति के प्रस्तावित दौरे को देखते हुए उत्तराखंड शासन और रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने संबंधित अधिकारियों को व्यवस्थाएं समय पर पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने भी दौरे की तैयारियों को लेकर बैठक की। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था, हेलीकॉप्टर संचालन, आवागमन और प्रोटोकॉल से जुड़ी व्यवस्थाओं पर ध्यान दिया जा रहा है।
केदारनाथ धाम की ऊंचाई और वहां के संवेदनशील मौसम को देखते हुए हवाई संचालन तथा अन्य व्यवस्थाओं के बीच समन्वय महत्वपूर्ण रहेगा।
केदारनाथ मंदिर के कपाट 11 नवंबर को बंद होने हैं। ऐसे में राष्ट्रपति का प्रस्तावित दौरा कपाट बंद होने से लगभग नौ दिन पहले होगा। इस वर्ष धाम में श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड आवाजाही के बीच राष्ट्रपति के दौरे को लेकर प्रशासनिक तैयारियां महत्वपूर्ण हो गई हैं।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण सबसे बड़ी चुनौती
चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या का 60 लाख के पार पहुंचना उत्तराखंड के धार्मिक पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। लेकिन इस उपलब्धि के साथ श्रद्धालुओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता और पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है।
एक ओर चारों धामों में श्रद्धालुओं की मौतों का आंकड़ा स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर रहा है, तो दूसरी ओर हरिद्वार में गंगा के घाटों पर जमा कचरा धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी निभाने की आवश्यकता को सामने ला रहा है।
केदारनाथ में बर्फबारी और गिरते तापमान के बीच यात्रा के अंतिम दिनों में अतिरिक्त सावधानी बरतना भी जरूरी है। राष्ट्रपति के प्रस्तावित दौरे के दौरान सुरक्षा और व्यवस्थाओं पर प्रशासन का विशेष ध्यान रहेगा।
ऐसे में चारधाम यात्रा की सफलता का आकलन केवल श्रद्धालुओं की संख्या और दर्शन की व्यवस्था से नहीं किया जा सकता। सुरक्षित यात्रा, समय पर चिकित्सा सहायता, स्वच्छ धार्मिक स्थल और पर्यावरण संरक्षण भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
इन सभी पहलुओं पर प्रभावी काम होने से ही उत्तराखंड की धार्मिक यात्रा व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और टिकाऊ बनाया जा सकता है।




