हरिद्वार में भगवा सैलाब। 3.20 करोड़ कांवड़िए रवाना, डाक कांवड़ के साथ हाईवे पर बढ़ा ट्रैफिक दबाव
हरिद्वार। कांवड़ मेले का अंतिम चरण शुरू होते ही धर्मनगरी हरिद्वार पूरी तरह भगवामय हो गई है। हरकी पैड़ी से लेकर गंगा घाटों, बाजारों और हाईवे तक हर तरफ शिवभक्तों की भारी भीड़ नजर आ रही है।
अब तक **3 करोड़ 20 लाख से अधिक कांवड़िए गंगाजल लेकर अपने गंतव्यों के लिए रवाना हो चुके हैं।** पैदल कांवड़ियों की संख्या कम होने के साथ ही अब डाक कांवड़ वाहनों की आमद तेजी से बढ़ रही है।
रविवार सुबह हरकी पैड़ी और आसपास के घाटों पर बड़ी संख्या में शिवभक्त गंगाजल भरते दिखाई दिए। वहीं शहर की प्रमुख पार्किंग में भी डाक कांवड़ वाहनों का दबाव बढ़ गया है।
बैरागी कैंप पार्किंग में बड़ी संख्या में बड़े कांवड़ वाहन खड़े हैं, जबकि दीनदयाल, रोड़ीबेलवाला, पंतद्वीप, गौरीशंकर और गड्ढा पार्किंग में छोटे वाहनों की संख्या बढ़ रही है। प्रशासन की ओर से पार्किंग स्थलों से लगातार वाहनों की निकासी कराई जा रही है।
डाक कांवड़ वाहनों से हाईवे पर बढ़ा दबाव
डाक कांवड़ के कारण हरिद्वार के हाईवे पर भी वाहनों की लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब समेत कई राज्यों से शिवभक्त अपने वाहनों को सजाकर हरिद्वार पहुंच रहे हैं। कई वाहनों पर भगवान शिव की प्रतिमाएं लगी हैं तो कई में डीजे और भक्ति गीतों के साथ कांवड़िए गंगाजल लेने पहुंच रहे हैं।
प्रशासन के अनुसार डाक कांवड़ वाहनों की रवानगी का सिलसिला **10 अगस्त की रात तक** जारी रहने की संभावना है। ऐसे में अगले दो दिनों तक हरिद्वार में श्रद्धालुओं की भीड़ और हाईवे पर यातायात का दबाव बना रह सकता है।
डीएम और एसएसपी ने देर रात लिया व्यवस्थाओं का जायजा
कांवड़ मेले के अंतिम चरण को देखते हुए जिलाधिकारी मयूर दीक्षित और एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने देर रात ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर मोतीचूर तक हाईवे का निरीक्षण किया। दोनों अधिकारियों ने यातायात, पार्किंग और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।
अधिकारियों ने चौक-चौराहों पर तैनात पुलिसकर्मियों से यातायात और पार्किंग की स्थिति की जानकारी ली तथा कांवड़ मेले में तैनात एसपीओ का भी उत्साहवर्धन किया।
डीएम मयूर दीक्षित ने बताया कि डाक कांवड़ शुरू होने के साथ कांवड़ पटरी पर पैदल कांवड़ियों की संख्या कम हुई है। अब हाईवे और पार्किंग क्षेत्रों में व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है। कांवड़ पटरी के शौचालय, लाइटिंग समेत अन्य सुविधाओं को जरूरत के अनुसार हाईवे और पार्किंग क्षेत्रों में शिफ्ट किया जा रहा है।
अलग-अलग बॉर्डर से वाहनों के लिए रूट तय
एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर के मुताबिक डाक कांवड़ वाहनों की बढ़ती संख्या को देखते हुए रूट डायवर्जन प्लान लागू किया गया है। वाहनों को निर्धारित मार्गों से ही संचालित कराया जा रहा है।
दिल्ली, नोएडा, मेरठ और मुजफ्फरनगर की ओर जाने वाले वाहनों को नारसन बॉर्डर से भेजने की व्यवस्था की गई है। सहारनपुर, हरियाणा और पंजाब जाने वाले वाहनों को भगवानपुर बॉर्डर से भेजा जाएगा। वहीं बिजनौर और मुरादाबाद की ओर जाने वाले वाहनों के लिए हरिद्वार-नजीबाबाद हाईवे का इस्तेमाल किया जा रहा है।
नारसन और भगवानपुर बॉर्डर से आने वाले वाहनों को नगला इमरती बायपास होते हुए हरिद्वार भेजा जा रहा है। जगजीतपुर डायवर्जन प्वाइंट से डाक कांवड़ वाहनों को बैरागी कैंप पार्किंग में भेजा जा रहा है।
बैरागी कैंप में 30 हजार वाहनों की क्षमता
बैरागी कैंप पार्किंग में करीब **30 हजार वाहनों** को खड़ा करने की क्षमता है। इसके अलावा दीनदयाल, रोड़ीबेलवाला, पंतद्वीप और गौरीशंकर समेत अन्य पार्किंग स्थलों में भी वाहनों को खड़ा कराया जा रहा है।
पुलिस का कहना है कि पार्किंग स्थलों की क्षमता पर लगातार नजर रखी जा रही है। किसी पार्किंग के भरने की स्थिति में वाहनों को वैकल्पिक पार्किंग स्थलों की ओर भेजने की व्यवस्था की गई है।
टिहरी में भी एसएसपी ने संभाला मोर्चा
उधर, टिहरी गढ़वाल में भी कांवड़ मेले के दौरान बढ़ती भीड़ और यातायात दबाव को देखते हुए एसएसपी **श्वेता चौबे** खुद सड़कों पर उतरीं। उन्होंने मुनिकीरेती, ब्रह्मानंद मोड़, खारा स्रोत, भद्रकाली समेत प्रमुख कांवड़ मार्गों का स्थलीय निरीक्षण किया।
नीलकंठ जाने वाले कांवड़ियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए ढालवाला, भद्रकाली, ब्रह्मानंद मोड़, तपोवन और गरुड़चट्टी मार्ग पर यातायात व्यवस्था का जायजा लिया गया। एसएसपी ने जाम वाले स्थानों पर पुलिसकर्मियों को तत्काल यातायात सुचारू कराने के निर्देश दिए।
पांच करोड़ तक पहुंच सकता है आंकड़ा
प्रशासन के अनुमान के मुताबिक पिछले वर्ष करीब चार करोड़ कांवड़िए हरिद्वार पहुंचे थे। इस बार यह आंकड़ा **पांच करोड़ तक पहुंचने की संभावना** जताई जा रही है। इसी अनुमान को देखते हुए पार्किंग, यातायात, सुरक्षा, पेयजल, बिजली और शौचालय समेत अन्य व्यवस्थाओं को बढ़ाया गया है।
अधिकारियों का कहना है कि कांवड़ मेले के अंतिम चरण में सबसे बड़ी चुनौती डाक कांवड़ वाहनों की सुरक्षित और सुचारू निकासी है। पुलिस और प्रशासन की टीमें लगातार ग्राउंड जीरो पर निगरानी कर रही हैं, ताकि करोड़ों शिवभक्तों की आस्था का यह पर्व शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराया जा सके।


