हाईकोर्ट की सख्ती! चीफ इंजीनियर को 10 दिन का अल्टीमेटम, आदेश न मानने पर होगी सजा
देहरादून। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) से जुड़े टेंडर मामले में न्यायालय के आदेशों की अवहेलना पर कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित चीफ इंजीनियर को 10 दिनों के भीतर न्यायालय के आदेशों का पालन करने का निर्देश दिया है।
साथ ही स्पष्ट किया है कि यदि तय समय में आदेशों का पालन नहीं किया गया तो अगली सुनवाई में उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर सजा का सामना करना होगा।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता जितेंद्र चौधरी ने बताया कि पीएमजीएसवाई के तहत जारी एक टेंडर में मैसर्स जियारा पार्टनरशिप फर्म ने भाग लिया था, लेकिन विभाग ने उसकी तकनीकी बोली (टेक्निकल बिड) को अस्वीकार कर दिया। इसके खिलाफ फर्म ने उत्तराखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
प्रारंभिक सुनवाई में हाईकोर्ट ने टेंडर प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। बाद में फरवरी 2026 में खंडपीठ ने याचिका स्वीकार करते हुए फर्म को टेंडर प्रक्रिया में शामिल करने का आदेश दिया। आरोप है कि न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद विभाग ने आदेश का पालन नहीं किया और टेंडर प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई।
इसके बाद याचिकाकर्ता ने अवमानना याचिका दायर की, जिसमें चीफ इंजीनियर को पक्षकार बनाया गया। याचिका में यह भी कहा गया कि सबसे कम बोली (लोएस्ट बिड) होने के बावजूद विभाग जानबूझकर फर्म को टेंडर देने से बच रहा है और किसी अन्य को लाभ पहुंचाने की कोशिश कर रहा है।
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने चीफ इंजीनियर के खिलाफ अवमानना के आरोप तय (चार्ज फ्रेम) कर दिए। न्यायालय ने उन्हें 10 दिन के भीतर खंडपीठ के आदेशों का पालन करने का अंतिम अवसर दिया है।
साथ ही चेतावनी दी है कि यदि आदेशों का पालन नहीं हुआ तो अगली सुनवाई में उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर सजा सुनवाई की कार्रवाई का सामना करना होगा।


