परिवार नियोजन कार्यक्रमों पर 10 वर्षों में 7,289 करोड़ रुपये से अधिक खर्च
नई दिल्ली। सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम, 2005 के तहत आरटीआई एक्टिविस्ट हेमंत गौनिया द्वारा दायर आवेदन पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने परिवार नियोजन कार्यक्रमों पर हुए खर्च से संबंधित महत्वपूर्ण वित्तीय जानकारी सार्वजनिक की है।
मंत्रालय द्वारा उपलब्ध कराए गए आधिकारिक अभिलेखों से पता चला है कि पिछले एक दशक में परिवार नियोजन कार्यक्रमों पर 7,289 करोड़ रुपये से अधिक की राशि व्यय की गई है।
आरटीआई एक्टिविस्ट हेमंत गौनिया ने आरटीआई पोर्टल के माध्यम से आवेदन संख्या MOHFW/R/X/25/00531/1 दायर कर परिवार नियोजन कार्यक्रमों के बजट, व्यय और संबंधित सूचनाएं मांगी थीं।
इस पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के वित्त प्रभाग ने पत्र संख्या F.No. A.12021/66/2025-NHM-Finance के माध्यम से जवाब उपलब्ध कराया।
राज्यों को एकमुश्त अनुदान सहायता
मंत्रालय ने अपने उत्तर में स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) तथा प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (PM-ABHIM) के अंतर्गत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अनुदान सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
यह सहायता गतिविधि-वार नहीं बल्कि एकमुश्त जारी की जाती है, जिससे राज्य अपनी स्थानीय आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के अनुसार धनराशि का उपयोग कर सकें।
वर्षवार व्यय का विवरण
आरटीआई के जवाब में उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार परिवार नियोजन कार्यक्रमों पर निम्नलिखित व्यय दर्ज किया गया:
- 2015-16 : ₹576.90 करोड़
- 2016-17 : ₹577.00 करोड़
- 2017-18 : ₹615.43 करोड़
- 2018-19 : ₹654.04 करोड़
- 2019-20 : ₹654.70 करोड़
- 2020-21 : ₹570.84 करोड़
- 2021-22 : ₹727.20 करोड़
- 2022-23 : ₹977.53 करोड़
- 2023-24 : ₹1,017.74 करोड़
- 2024-25 : ₹917.79 करोड़
इन आंकड़ों के अनुसार पिछले दस वर्षों में कुल लगभग 7,289 करोड़ रुपये खर्च किए गए। वर्ष 2023-24 में परिवार नियोजन कार्यक्रमों पर 1,017.74 करोड़ रुपये का व्यय दर्ज किया गया, जो इस अवधि का सर्वाधिक खर्च रहा।
राज्यों की वित्तीय रिपोर्ट पर आधारित आंकड़े
मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि उपलब्ध कराए गए व्यय संबंधी आंकड़े राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा प्रस्तुत वित्तीय प्रबंधन रिपोर्ट (FMR) के आधार पर संकलित किए गए हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि परिवार नियोजन कार्यक्रमों के लिए लगातार बड़े पैमाने पर सरकारी धनराशि खर्च की जाती रही है।
अन्य विभागों को भी भेजा गया आवेदन
आरटीआई के जवाब में मंत्रालय ने बताया कि आवेदन में मांगी गई कुछ सूचनाएं अन्य प्रभागों और विभागों से संबंधित हैं।
इसलिए सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 6(3) के तहत आवेदन को संबंधित विभागों को अग्रेषित कर दिया गया है, ताकि वे अपने अधिकार क्षेत्र की जानकारी सीधे आवेदक को उपलब्ध करा सकें।
इससे संभावना है कि आने वाले समय में स्वास्थ्य मंत्रालय के अन्य विभागों से भी अतिरिक्त जानकारी सामने आ सकती है।
आगे के जवाबों पर नजर
आरटीआई एक्टिविस्ट हेमंत गौनिया का कहना है कि यह केवल प्रथम चरण में प्राप्त सूचना है। आवेदन के कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अभी अन्य विभागों से जवाब आना बाकी है।
सभी विभागों से जानकारी प्राप्त होने के बाद उपलब्ध तथ्यों का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।
पारदर्शिता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
आरटीआई के माध्यम से सामने आई यह जानकारी सरकारी योजनाओं में खर्च होने वाली सार्वजनिक धनराशि की पारदर्शिता को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
साथ ही यह प्रश्न भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि परिवार नियोजन कार्यक्रमों पर किए गए इस बड़े निवेश का जमीनी स्तर पर कितना प्रभाव पड़ा और निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति किस सीमा तक हुई।
(यह रिपोर्ट आरटीआई एक्टिविस्ट हेमंत गौनिया को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई आधिकारिक जानकारी पर आधारित है।)

