चारधाम यात्रा में प्रशासन अलर्ट। खाद्य सुरक्षा जांच तेज, श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ी, गर्जिया मंदिर बंद
देहरादून। उत्तराखंड में चारधाम यात्रा 2026 के चलते प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है। एक ओर लाखों श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को संभालने की चुनौती है, तो दूसरी ओर खाद्य सुरक्षा, धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।
राज्य में खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने चारधाम यात्रा मार्गों पर सघन जांच अभियान शुरू किया है। आयुक्त सचिन कुर्वे के निर्देश पर और अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी के नेतृत्व में टीमें होटल, ढाबों, फल-सब्जी मंडियों और फूड स्टॉल्स की जांच कर रही हैं।
28 अप्रैल को प्रदेशभर से 33 खाद्य नमूने एकत्र किए गए, जिनमें सबसे अधिक 12 सैंपल हरिद्वार से लिए गए। इन नमूनों को प्रयोगशाला भेजा गया है और रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
इसी बीच नैनीताल जिले के रामनगर स्थित Garjiya Devi Temple में श्रद्धालुओं की मुख्य मंदिर तक आवाजाही फिलहाल रोक दी गई है। मंदिर के टीले के सुदृढ़ीकरण कार्य के चलते यह निर्णय लिया गया है।
हालांकि श्रद्धालुओं के लिए लक्ष्मी नारायण मंदिर में वैकल्पिक दर्शन की व्यवस्था की गई है। प्रशासन के अनुसार मंदिर को 30 मई तक बंद रखा जा सकता है, जिसे जरूरत पड़ने पर आगे बढ़ाया भी जा सकता है।
चारधाम यात्रा की बात करें तो शुरुआती 10 दिनों में ही 4 लाख से अधिक श्रद्धालु धामों में पहुंच चुके हैं। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार 28 अप्रैल तक कुल 4,08,401 श्रद्धालु यात्रा कर चुके हैं, जिनमें सबसे अधिक संख्या केदारनाथ धाम की रही है।
यात्रा में बढ़ती भीड़ को देखते हुए Satpal Maharaj ने कैरिंग कैपेसिटी पर जोर दिया है। उनका कहना है कि पहाड़ों की सीमित क्षमता को देखते हुए नियंत्रित संख्या में ही श्रद्धालुओं को यात्रा करनी चाहिए, ताकि सुरक्षा और व्यवस्थाएं प्रभावित न हों।
इस बीच, प्रसिद्ध सूफी गायक Kailash Kher भी बदरीनाथ धाम पहुंचे और पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया। उन्होंने यहां की व्यवस्थाओं और प्राकृतिक सौंदर्य की सराहना करते हुए इसे “देवलोक जैसा अनुभव” बताया।
प्रशासन की ओर से यात्रियों को एडवाइजरी जारी करते हुए कहा गया है कि यात्रा जल्दबाजी में पूरी करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से करें और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें।
आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है, ऐसे में राज्य के सामने सबसे बड़ी चुनौती भीड़ नियंत्रण और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करना है।

