किसान आत्महत्या मामले में हाईकोर्ट ने तीन और आरोपितों की गिरफ्तारी पर लगाई रोक
रिपोर्ट- मीनाक्षी सिंह गौर
नैनीताल। हाईकोर्ट ने काशीपुर के किसान सुखवंत सिंह आत्महत्या मामले में बड़ी राहत देते हुए तीन और नामजद आरोपितों की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।
अवकाशकालीन न्यायाधीश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की एकलपीठ ने आरोपितों को जांच में सहयोग करने के निर्देश देते हुए विपक्षियों से जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 15 अप्रैल को होगी।
सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि यह प्रकरण जमीन विवाद से जुड़ा है और सरकार इसे बेहद गंभीरता से ले रही है। मामले की जांच जारी है और इसकी निगरानी स्वयं डीजीपी स्तर से की जा रही है। जांच एसआईटी को सौंप दी गई है।
वहीं याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि इस मामले में मुख्य आरोपितों समेत अन्य लोगों की गिरफ्तारी पर पहले ही हाईकोर्ट द्वारा रोक लगाई जा चुकी है।
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि उनका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है और उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया है। यह दो पक्षों के बीच जमीन से जुड़ा विवाद है और किसान ने आत्महत्या की है, ऐसे में उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे को निरस्त किया जाए।
क्या है पूरा मामला
गौरतलब है कि बीते दिनों काशीपुर निवासी किसान सुखवंत सिंह ने हल्द्वानी के काठगोदाम स्थित एक होटल में खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। आत्महत्या से पहले उन्होंने फेसबुक पोस्ट के जरिए पुलिस और अन्य लोगों पर गंभीर आरोप लगाए थे।
किसान का आरोप था कि जमीन के नाम पर उनके साथ धोखाधड़ी हुई और उनसे करीब चार करोड़ रुपये ठग लिए गए। उन्होंने कई बार पुलिस से शिकायत की, लेकिन कार्रवाई के बजाय उन्हें कथित तौर पर डराया-धमकाया गया।
किसान की मौत के बाद उनके बड़े भाई की तहरीर पर काशीपुर के आईटीआई थाना क्षेत्र में पुलिस ने 26 लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया। इसमें अमरजीत सिंह, दिव्या, रविन्द्र कौर, लवप्रीत कौर, कुलविंदर सिंह उर्फ जस्सी, हरदीप कौर, आशीष चौहान समेत अन्य आरोपितों के नाम शामिल हैं।
हाईकोर्ट का रुख
हाईकोर्ट ने पूर्व में पारित आदेशों का हवाला देते हुए तीन अन्य आरोपितों की गिरफ्तारी पर रोक लगाई है और स्पष्ट किया है कि सभी आरोपित जांच में पूरा सहयोग करेंगे। कोर्ट ने सरकार व अन्य विपक्षियों को मामले में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
यह मामला राज्य में जमीन विवाद, पुलिस कार्रवाई और जवाबदेही को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

