गजब: विद्यालय में 40 बच्चों के खाने के लिए बनाई 70 ग्राम सोयाबीन की सब्जी

विद्यालय में 40 बच्चों के खाने के लिए बनाई 70 ग्राम सोयाबीन की सब्जी

 

 

– अधिकारियों की लापरवाही से शिक्षा व्यवस्था पटरी से उतरी

– मीनू सिस्टम भी हुआ फेल, बच्चों को नहीं मिल पा रहा है समय से व मीनू से भोजन

कौशाम्बी। जहाँ एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बच्चों की शिक्षा पर जोर दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उन्ही के ही जिम्मेदार अधिकारी की घोर लापरवाही व अनदेखा के चलते कौशाम्बी में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से पटरी से उतर चुकी है। न तो अध्यापक टाइम से स्कूल पहुंचते है, न ही बच्चों को टाइम से भोजन मिल पाता है, न ही बच्चों को नियमित रुप से शिक्षा प्राप्त हो रही है।

 

कौशाम्बी जिले की शिक्षा व्यवस्था में नेवादा ब्लॉक के ग्राम सभा रसूल पुर बिउर के मजरा पिपरहाई गाँव में मौजूद प्राइमरी स्कूल में प्रधानाध्यापक गुलाब चन्द्र मिश्रा की घोर लापरवाही देखने को मिल रही है। यह स्कूल में टाइम से नहीं पहुंचते और आते भी है, तो स्कूल में नहीं दिखाई देते और मिल भी जाए तो इनसे कुछ भी जानकारी लेना चाहें तो यह कुछ भी बताने से इन्कार कर देते है। जिससे साफ जाहिर होता है कि, लीपा-पोती जोरों से की जा रही है, और इसी तरह अध्यापक राजेश का भी हाल है, यह कक्षा सात के बच्चों को पढ़ाते हैं। लेकिन उस स्कूल में कक्षा सात के बच्चे कक्षा आठ में अध्यापक मनोज कुमार के क्लास में पढ़ते हैं, यह है अध्यापक राजेश की लापरवाही ।

Advertisements

 

 

बता दें कि, अगर इसी विद्यालय के बच्चों की अगर बात करें तो बच्चों के भोजन की तो यहाँ भी घोर धांधली देखी जा रही है। यहाँ पर बच्चों को समय से भोजन नहीं मिल पाता, यहाँ पर लन्च का समय है सुबह 11:30 बजे और 12:00 बजे क्लास चालू होना है। लेकिन कुछ उल्टा ही है, यहाँ पर लन्च तो 11:30 बजे हो जाता है, लेकिन वहीं बच्चों को भोजन 12:40 पर मिलता है। आखिर क्यों? अब सोंचो कि, जब इतने बजे भोजन मिला तो क्लास कितने बजे शुरु होगी।

 

यहाँ पर भोजन बनाने के लिए मौजूद सत्यवती उम्र 50 वर्ष व सावित्री उम्र 48 वर्ष इन दोनों महिलाओं से कुछ जानकारी ली गई तो यहाँ भी घपले बाजी का अम्बार देखा गया, यहाँ पर 40 बच्चों के बीच में महज तीन किलो चावल व 70 ग्राम सोयाबीन में बन गई तहरी और बच्चों से रोस्टर जाना गया तो यहाँ पर बच्चों को दूध व फल तो होंठों मे लगाने को नहीं मिल पाता तो पीने की बात तो दूर। इस संदर्भ में ग्राम प्रधान का कहना है कि, हम परेशान है पैसे की कमजोरी है।

 

 

यह भी बताते चलें कि, इस स्कूल में बिजली विभाग को भी गुमराह कर चोरी से कटिया लगाकर बिजली सप्लाई की जाती है। अब इन सब बातों के घेरे में एक बड़ा सवाल बनकर सामने खड़ा है। अब इस सवाल का जवाब कौन देगा?अधिकारी या प्रधानाध्यापक, गुलाब चन्द्र मिश्रा या फिर ग्राम प्रधान या फिर वहां मौजूद अध्यापक जो इतना बड़ा भ्रष्टाचार का होड़ लगा रहे है। क्या जिला अधिकारी मनीष कुमार वर्मा इस भ्रष्टाचार की तरफ ध्यान दे पायेंगे?