Exclusive: घने साल के वृक्षों से आच्छादित जंगल को लगी तस्करों की नजर

घने साल के वृक्षों से आच्छादित जंगल को लगी तस्करों की नजर

 

– परिक्षेत्रधिकारी एवं कर्मचारी जानबूझकर आँख मूंदे बैठे….

वनपरिक्षेत्र का हाल अंधेर नगरी-चौपट राजा की तर्ज पर….

कोरबा, पाली। कटघोरा वनमंडल अंतर्गत पाली परिक्षेत्र के निष्क्रिय अधिकारी-कर्मचारी विभागीय कसावट के अभाव में लापरवाही के शिखर को लांघने से बाज नही आ रहे है।विभाग पर वनों की रक्षा का दायित्व है, परंतु परिक्षेत्रधिकारी व बीट में तैनात कर्मचारियों की अनदेखी और कार्यो के प्रति उदासीनता से वन संपदा को भारी नुकसान पहुँच रहा है। ऐसे में लापरवाह अधिकारी एवं वन कर्मियों की निष्क्रियता से वन माफियाओं की चांदी हो गई है।

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बताते चलें कि, घनघोर बड़े-बड़े हरियाली लिए साल व अन्य वृक्षों से आच्छादित करतली से उड़ता के मध्य जंगल को इन दिनों लकड़ी तस्करों की नजर लग गई है। वन माफिया इमारती लकड़ियो के चक्कर में साल सहित अन्य हरे-भरे बड़े-बड़े पेड़ों की बेदर्दी से कटाई करने में लगे है। उक्त वनों की अवैध कटाई के बारे में पाली परिक्षेत्र के अधिकारियों एवं फिल्ड के कर्मचारियों को भी है। लेकिन वनमंडलाधिकारी की पकड़ से बाहर होने का फ़ायदा उठाकर आँख मूंदे बैठे है।

 

अलबत्ता करोडो रूपए प्रतिवर्ष खर्च कर वन बचाने की सरकारी मंशा में ऐसे अधिकारी-कर्मचारियों की वजह से पानी फिरता नजर आ रहा है, और ग्रामीणों को वनोपज के साथ-साथ वन विभाग को भी राजस्व देने वाला जंगल अब तस्करों के हवाले हो गया है। जहाँ करतली से उड़ता के बीच घने जंगलों से सैकड़ों की तादाद में साल सहित अन्य पेड़ काट दिए गए, जिसका आंकलन लगा पाना फिलहाल मुश्किल है। इस तरह घने जंगल का उजाड़ भी हो चला।वनपरिक्षेत्र अंतर्गत डिप्टी रेंजर व बीट गार्ड की तैनाती में जंगल की सुरक्षा का दायित्व होता है, तथा गश्त की जाती है।वहीं इसकी मॉनिटरिंग रेंजर द्वारा की जाती है। लेकिन पाली वनपरिक्षेत्र का हाल तो अंधेर नगरी-चौपट राजा की तर्ज पर चल रहा है।

 

 

जिसके कारण जंगल की सुरक्षा चौपट हो गई है।वन तस्कर उक्त जंगल में किस प्रकार तबाही मचा रहे है, इसका अंदाजा मौके पर जाकर देखा जा सकता है। जहां पहुँचते ही हरियाली से भरे इस जंगल में जगह-जगह कीमती पेड़ के कटे ठूंठ देखे जा सकते है। रही बात वनपरिक्षेत्राधिकारी प्रहलाद यादव की तो वे वातानुकूलिन कक्ष में बैठे-बैठे अपने जिम्मेदारियों का किस तरह निर्वह कर रहे है, यह तो वनों के विनाशक्रम को देखकर उनके कर्तव्यों को आंका जा सकता है। यदि यही हाल रहा तो इस जंगल को मैदान बनने से कोई नही रोक सकता।