Exclusive: निजी उपयोग के वाहन का सरकारी खजाने से हो रहा भुगतान

निजी उपयोग के वाहन का सरकारी खजाने से हो रहा भुगतान

 

 

– अधिशासी अभियंता के कृत्य पर विभाग के अधीक्षण अभियंता और मुख्य अभियंता ने साधी चुप्पी….

38 किलोग्राम के पाइप डालने के बजाय 19 किलोग्राम के पाइप डालकर करोडो के घोटाले की जांच अभी ठंडी भी नही हुई थी कि, एक नया घोटाला फिर उजागर हो गया। यह घोटाला कुछ यूं है कि, अधिकारी के उपयोग के लिए विभाग का सरकारी वाहन कार्यालय में मौजूद है पर इस वाहन पर डीजल/मरम्मत के नाम पर बजट भी विभाग से निकाला जा रहा है। नियम विरूद्ध तरीके से कान्टेक्ट के वाहन में भुगतान कर बंगले में खडा करने के मामले में भ्रष्टाचार की कलई में एक कडी का और जुडना तय है।

 

 

कौशाम्बी। जल निगम कार्यालय भरवारी के अधिकारियो के कारनामों के चलते यह कार्यालय हमेशा सुर्खियो में रहता है।पूरब शरीरा पाइप लाइन बिछाये जाने की योजना में 38 किलोग्राम का पाइप डालने के बजाय 19 किलोग्राम के पाइप डालकर करोडो के घोटाले की जांच अभी ठण्डी भी नही हुई है, और इस घोटाले की जांच आलाधिकारियो द्वारा करायी जा रही है। की इसी बीच जल निगम के अधिशासी अभियंता का एक नया घोटाला सामने आया है। अधिकारी के उपयोग के लिए विभाग का सरकारी वाहन कार्यालय में मौजूद है।

 

 

बता दें कि, कॉन्टेक्ट के इस वाहन पर डीजल और मरम्मत के नाम पर बजट भी विभाग से निकाला जा रहा है। इस वाहन के होते हुए भी अपने खास व्यक्ति के एक लग्जरी वाहन को अधिकारी ने कान्टेक्ट पर लगा लिया है, और कन्टेक्ट का वाहन अधिकारी के परिजन साग भाजी फल मिठाई की खरीददारी में उपयोग करते है। यह वाहन अक्सर अधिशासी अभियंता के इलाहाबाद बंगले में खडा देखा जाता है।

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सूत्रो की माने तो कान्टेक्ट के इस वाहन के नाम पर 5 लाख रूपये से अधिक का भुगतान प्रत्येक वर्ष सरकारी खजाने से जल निगम द्वारा किया जा रहा है। नियम विरूद्ध तरीके से कान्टेक्ट के वाहन में भुगतान कर इलाहाबाद बंगले में वाहन को खडा करने के मामले में यदि शासन ने सूक्ष्म जांच कराई तो अधिशासी अभियंता जल निगम के भ्रष्टाचार की कलई में एक कडी का और जुडना तय है।

 

 

सिर्फ इतना ही नहीं सरकारी धन को गलत तरीके से खर्च कर पत्नी-बच्चो को लाभ देने के मामले में अधिशासी अभियंता पर शासन का चाबुक भी चल सकता है। लेकिन क्या भाजपा की योगी सरकार में जल निगम के इस भ्रष्ट अधिशासी अभियंता के कारनामे उजागर होगें? और क्या इन्हे दंड मिल पायेगा ? यह बडा सवाल है।

 

आखिर क्यों साधी आलाधिकारियों ने चुप्पी

 

जल निगम कार्यालय भरवारी में सरकारी योजनाओ को पलीता लगाकर सरकारी धन लूटने वाले अधिशासी अभियंता के कृत्य पर विभाग के अधीक्षण अभियंता और मुख्य अभियंता ने चुप्पी साध रखी है। जिस वजह से अधिशासी अभियंता का हौसला बुलन्द है। विभागीय अधिकारियो के चुप्पी साध लेने के बाद भ्रष्टाचार में उनके शामिल होने से इंकार नही किया जा सकता। उक्त प्रकरण में अगर जांच हुयी तो इनकी संलिप्तता उजागर हो सकती है।