जब प्रदेश के मुखिया ही बेसुध हो तो विभाग की लापरवाही लाज़मी है

जब प्रदेश के मुखिया ही बेसुध हो तो विभाग की लापरवाही लाज़मी है

 

रुद्रपुर। ऊधमसिंह नगर जिले में लगातार पैर पसार रहे डेंगू से आम जनता में भय का माहौल है। जिले में सिर्फ रुद्रपुर जिला अस्पताल में भी एलाइजा टेस्ट की सुविधा होने के कारण आम जनता को मजबूरी में महंगे प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराना पड़ रहा है। मौके का फायदा उठाकर निजी अस्पताल मरीजों को इलाज के नाम पर खूब लूट रहे हैं। जिले में स्वास्थ्य विभाग के पास ब्लड प्लेटलेट्स चढ़ाने की व्यवस्था नहीं होने का भी फायदा निजी अस्पताल उठा रहे हैं।

 

 

बताते चलें कि, 382 मरीजों में डेंगू की पुष्टि बीते बुधवार तक हो चुकी है। लोगों में लगातार डेंगू के लक्षण भी मिल रहे हैं। अधिकांश मरीजों में ब्लड प्लेटलेट्स काफी है, लेकिन ब्लड बैंक कर्मियों को अभी तक 22 लाख 90 हजार रुपये में खरीदी गई प्लेटलेट्स सैपरेटर मशीन में प्लेटलेट्स तैयार करने का प्रशिक्षण दिया ही नही गया।

 

 

गौरतालब है कि, डेंगू के चलते ब्लड प्लेटलेट्स कम होने के कारण लोग को मजबूर होकर निजी अस्पतालों में जाना पड़ रहा है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग द्वारा ब्लड प्लेटलेट्स बनाने वाली 22 लाख 90 हजार रुपये में खरीदी गई प्लेटलेट्स सैपरेटर मशीन ब्लड बैंक में धूल फांक रही है।

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चूंकि, स्वास्थ्य विभाग स्वयं सीएम के पास होने के कारण भी उत्तराखण्ड प्रदेश में मरीजों को डेंगू का सही उपचार और बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था नही मिल पा रही है। जिले में डेंगू का प्रकोप होने के बावजूद भी ब्लड बैंक कर्मियों को इस मशीन से ब्लड प्लेटलेट्स तैयार करने का अभी तक कोई प्रशिक्षण नही दिया गया। एक यूनिट रक्त से करीब पांच से छह हजार प्लेटलेट्स तैयार की जाती है। जबकि, सामान्य व्यक्ति को कम से कम डेढ़ लाख तक प्लेटलेट्स की जरूरत होती है। यदि स्वास्थ्य विभाग और सूबे के मुखिया की यही लापरवाही रही तो जिले में डेंगू के मरीजों के लिए रक्त और प्लेटलेट्स तक नहीं उपलब्ध हो पाएगा।

 

 

वहीं निजी अस्पताल रक्तदाताओं के दान का मखौल उड़ा रहे हैं। जिले में रक्त की कमी को देखते हुए कई रक्तदाता जनसेवा करते हुए डेंगू के मरीजों के साथ गर्भवती महिलाओं व अन्य मरीजों को अपना रक्त दे रहे हैं। लेकिन इन निजी अस्पतालों द्वारा रक्तदान के बाद जांच के नाम पर मरीजों से मोटा पैसा वसूला जा रहा है। यानी रुपये के लालच में इन निजी अस्पताल संचालकों को रक्तदाताओं के महादान की भी परवाह नहीं रह गई। खटीमा से लेकर जसपुर तक प्राइवेट अस्पतालों में ऐसा ही खेल चल रहा है।

 

प्लेटलेट्स तैयार करने के प्रशिक्षण के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से डीजी हेल्थ को पत्र भेजा भी गया है। जल्द ही ब्लड बैंक कर्मियों को प्लेटलेट्स तैयार करने का प्रशिक्षण मिल सकता है। मरीज के शरीर में पांच हजार प्लेटलेट्स रहने पर प्लेटलेट्स चढ़ाई जाती है।

– जेएल चौधरी, ब्लड बैंक प्रभारी, रुद्रपुर।