फर्जी आरटीआई कार्यकर्ता बने ब्लैकमेलिंग और भ्रष्टाचार का जरिया

देहरादून। जनसूचना अधिकार अधिनियम की आड़ में कुछ लोग अपनी गोटियां फेरने में लगे हुए हैं। आरआईटी एक्टिविस्ट बने लोगों ने इसे कमाई का जरिया भी बना लिया हैं। कई पहलुओं पर जनसूचना अधिकार का दुरुपयोग किया जा रहा है। इस पर शासन और प्रशासन को सतर्कता बरतने चाहिए।

 

भ्रष्टाचार और सरकारी तंत्र से परेशान आम जनता को सूचना की ताकत मुहैया कराने के लिए बना सूचना अधिकार कानून अब भ्रष्टाचार और ब्लैकमेलिंग का जरिया बन गया है। सूचना आयोग के मुताबिक उनके पास आने वाले मामलों में से महज 20 फीसदी मामले ही हकीकत में जानकारी पाने के लिए होते हैं। जबकि 80 फीसदी से ज्यादा मामले ब्लैकमेलिंग या परेशान करने के लिए लगाए जाते हैं।

 

सिर्फ इतना ही नहीं कई जगह तो इस कानून को अपनी दुश्मनी निकालने के लिए भी नया तरीका बना लिया गया है। सूचना अधिकार अधिनियम ने भले ही देश में नई क्रांति पैदा कर आम जनता को सरकारी तंत्र में सूचना की ताकत मुहैया कराई हो। लेकिन इसका दुरूपयोग भी लगातार बढऩे लगा है। इस कानून का बेहतर इस्तेमाल करने के बजाय कई लोगों ने इसे ब्लैकमेलिंग का नया हथियार बना लिया है।

 

एक मामला जिसमें सरकारी नौकरी कर रहे दम्पति की नौकरी से लेकर व्यक्तिगत जानकारी उजागर करने के लिए आरटीआई लगाकर प्रताडि़त किया जा रहा था। यह सब महज इसलिए किया जा रहा था, क्योंकि, सरकारी नौकरी करने वाले पति-पत्नी के बेटे ने आरटीआई लगाने वाले व्यक्ति की बेटी को तलाक दे दिया था। इसी के बाद वह शख्स आरटीआई का हथियार लेकर उनके पीछे पड़ गए। लगभग आधा दर्जन से ज्यादा आवेदन लगाने के साथ ही मामले की अपील राज्य सूचना आयुक्त तक की गई।

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लेकिन असलियत सामने आने के बाद आयोग ने न केवल उनकी सभी अपीलें खारिज कर दी बल्कि उनको जमकर फटकार भी लगाई। घटनाएं प्रदेश में इस कानून के असली उपयोग की हकीकत बयां कर रहीं हैं। प्रदेश के तमाम सरकारी विभागों में इस वक्त आरटीआई के नाम पर ब्लैकमेलिंग और अफसरों पर फंदा डालकर अपना मकसद पूरा करने का खेल जमकर चल रहे है। जिसे कई बार सूचना आयोग ने अपनी जांच और मॉनिटरिंग में पकडा है।

 

वहीं खुद सूचना आयुक्त भी मानते हैं कि, आरटीआई में लगभग 80 फीसदी मामले ब्लैकमेलिंग के लिए लगाए जा रहे हैं।  सूचना अधिकार अधिनियम की बिगडती सूरत से कई आरटीआई एक्टिविस्ट भी परेशान हैं। उनकी माने तो इसे ब्लैकमेलिंग का हथियार बनाने की बढ़ती आदत पर तत्काल रोक लगनी चाहिए और सरकार के साथ खुद आयोग को भी इस दिशा में तत्काल सख्त कदम उठाने चाहिए।