खास खबर: देहरादून में जाम से मुक्ति की तैयारी, चालान भुगतान में अड़ंगा। दिल्ली-हरिद्वार सफर होगा आसान

देहरादून में जाम से मुक्ति की तैयारी, चालान भुगतान में अड़ंगा। दिल्ली-हरिद्वार सफर होगा आसान

देहरादून। उत्तराखंड में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने और सड़क कनेक्टिविटी मजबूत करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण गतिविधियां सामने आ रही हैं।

राजधानी देहरादून में एक ओर 600 से अधिक कैमरों के जरिए यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के चालान काटे जा रहे हैं, लेकिन भुगतान के लिए वाहन स्वामियों को ट्रैफिक कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

दूसरी ओर, चालान भुगतान की डिजिटल व्यवस्था में तकनीकी खामियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। वहीं, राजधानी की बिगड़ती यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए प्रशासन नया रोडमैप तैयार कर रहा है।

इन सबके बीच दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर को हरिद्वार से जोड़ने वाला 51 किलोमीटर लंबा छह लेन का संपर्क मार्ग भी निर्माण के अंतिम चरण में पहुंच गया है। इसके शुरू होने से दिल्ली से हरिद्वार की यात्रा करीब डेढ़ घंटे में पूरी होने की उम्मीद है।

डिजिटल चालान कट रहे, भुगतान के लिए दफ्तरों के चक्कर

देहरादून में यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर नजर रखने के लिए 600 से अधिक कैमरे लगाए गए हैं। इनकी मदद से गलत पार्किंग, रेड लाइट जंप करने और निर्धारित गति सीमा से अधिक रफ्तार में वाहन चलाने वालों के चालान काटे जा रहे हैं। स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत लगाए गए कैमरों का एक्सेस पुलिस विभाग को भी दिया गया है।

हालांकि, इस डिजिटल व्यवस्था का दूसरा पक्ष वाहन स्वामियों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। लोगों का कहना है कि ऑनलाइन चालान कटने के बाद जब वे भुगतान करने ट्रैफिक पुलिस कार्यालय पहुंचते हैं तो उन्हें सर्वर डाउन होने की जानकारी देकर वापस भेज दिया जाता है। कई लोगों को एक ही चालान जमा कराने के लिए दो से तीन बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

वाहन स्वामियों शिव कुमार और शांति प्रसाद का कहना है कि कई बार कार्यालय पहुंचने के बावजूद भुगतान नहीं हो पाता। इससे आने-जाने का खर्च और समय दोनों बर्बाद होते हैं।

जिलाधिकारी आशीष चौहान ने इस समस्या पर संज्ञान लेते हुए कहा है कि पुलिस विभाग से सर्वर की समस्या का कारण पूछा जाएगा और लोगों की परेशानी दूर करने के प्रयास किए जाएंगे।

देहरादून के ट्रैफिक सुधारने के लिए नया रोडमैप

राजधानी में लगातार बढ़ते वाहनों के दबाव और जाम की समस्या को देखते हुए प्रशासन अब यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए नए सिरे से योजना तैयार कर रहा है। इस पूरी कवायद पर गृह सचिव शैलेश बगौली नजर रख रहे हैं और अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकें भी कर चुके हैं।

प्रशासन ने पहले मसूरी के यातायात प्रबंधन को लेकर होमवर्क किया है। यहां कुल 42 पार्किंग स्थल चिह्नित किए गए हैं। इसके साथ ही अतिक्रमण हटाने और जाम प्रभावित क्षेत्रों में सुधार की योजना बनाई जा रही है।

अब इसी तर्ज पर देहरादून के लिए भी विस्तृत रोडमैप तैयार किया जा रहा है। इसमें नए पार्किंग स्थलों की पहचान, वाहनों के अधिक दबाव वाले क्षेत्रों का आकलन और ट्रैफिक लाइट्स की स्थिति की समीक्षा की जाएगी।

जिलाधिकारी आशीष चौहान के मुताबिक, मसूरी के बाद अब देहरादून के लिए भी यातायात सुधार की योजना बनाई जा रही है। इसमें पार्किंग से लेकर ट्रैफिक लाइट्स तक के विभिन्न पहलुओं का आकलन किया जाएगा।

दिल्ली से हरिद्वार का सफर डेढ़ घंटे में होने की उम्मीद

राजधानी की यातायात व्यवस्था के बीच हरिद्वार और दिल्ली के बीच सड़क कनेक्टिविटी को लेकर भी बड़ी परियोजना आगे बढ़ रही है।

दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर को हरिद्वार से जोड़ने वाला करीब 51 किलोमीटर लंबा छह लेन का संपर्क मार्ग निर्माण के अंतिम चरण में है। सड़क परिवहन मंत्रालय की ओर से इसे अगले दो महीने में शुरू करने की बात कही गई है।

इस परियोजना के तहत दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में हलगोया मुस्तकम के पास हरिद्वार के लिए अलग संपर्क मार्ग निकलेगा। यह मार्ग उत्तराखंड में बढेड़ी राजपूताना के निकट राष्ट्रीय राजमार्ग-334 से जुड़ेगा।

परियोजना का लगभग 92 प्रतिशत काम पूरा होने और करीब 46 किलोमीटर सड़क तैयार होने की जानकारी सामने आई है। इसके शुरू होने के बाद दिल्ली और एनसीआर से आने वाले श्रद्धालुओं को हरिद्वार पहुंचने के लिए एक बेहतर वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होगा।

पर्यटन और कारोबार को मिलेगी रफ्तार

हरिद्वार के विधायक और कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक के अनुसार, दिल्ली और आसपास के शहरों से कम समय में हरिद्वार पहुंचने की सुविधा मिलने से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। इसका लाभ होटल, धर्मशालाओं, रेस्तरां, ढाबों, टैक्सी संचालकों और स्थानीय कारोबारियों को मिल सकता है।

वहीं, एनएचएआई अधिकारियों के मुताबिक परियोजना का काम अंतिम चरण में है। बेहतर सड़क संपर्क से हरिद्वार पहुंचने वाले वाहनों को वैकल्पिक मार्ग मिलेगा और शहर की यातायात व्यवस्था को भी लाभ होगा।

अर्धकुंभ-2027 के लिहाज से भी महत्वपूर्ण परियोजना

हरिद्वार में वर्ष 2027 में प्रस्तावित अर्धकुंभ को देखते हुए इस सड़क परियोजना का महत्व और बढ़ गया है। स्नान पर्वों और धार्मिक आयोजनों के दौरान हरिद्वार में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

ऐसे में शहर के भीतर वाहनों का दबाव कम करने और बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों को बेहतर मार्ग उपलब्ध कराने में यह संपर्क मार्ग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

अर्धकुंभ मेला अधिकारी सोनिका सिंह के अनुसार, बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से वीकेंड और धार्मिक आयोजनों के दौरान बढ़ने वाली भीड़ के दबाव को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। इससे शहर के यातायात प्रबंधन को व्यवस्थित करने में प्रशासन को सहूलियत होगी।

जमीन और प्रॉपर्टी कारोबार पर भी पड़ेगा असर

नए संपर्क मार्ग से हरिद्वार और आसपास के क्षेत्रों में जमीन की कीमतों और प्रॉपर्टी कारोबार पर भी असर पड़ने की संभावना है।

स्थानीय प्रॉपर्टी कारोबारियों के मुताबिक, बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से संबंधित क्षेत्रों की पहुंच और व्यावसायिक उपयोगिता बढ़ती है। इससे निवेश और कारोबार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

कुल मिलाकर उत्तराखंड में यातायात व्यवस्था को लेकर तस्वीर के दो अलग-अलग पहलू सामने हैं। देहरादून में डिजिटल चालान व्यवस्था को दुरुस्त करने और शहर को जाम से राहत दिलाने की चुनौती है, जबकि दिल्ली-हरिद्वार संपर्क मार्ग जैसी बड़ी परियोजनाओं से प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी, पर्यटन और कारोबार को नई गति मिलने की उम्मीद है।

अब देखना होगा कि प्रशासनिक योजनाएं और निर्माणाधीन परियोजनाएं धरातल पर लोगों को कितनी राहत दे पाती हैं।