बाल संरक्षण की मिसाल बने दो मासूम, रेखा आर्या प्रकरण में ऑडियो की होगी फॉरेंसिक जांच
देहरादून। उत्तराखंड में बाल संरक्षण से लेकर प्रदेश की राजनीति तक, दो अलग-अलग मामले चर्चा में हैं। उत्तरकाशी के पुरोला में पारिवारिक उपेक्षा और विपरीत परिस्थितियों से जूझ रहे दो मासूम बच्चों की जिंदगी में बाल कल्याण समिति की पहल से सकारात्मक बदलाव आया है।
वहीं, देहरादून में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या से जुड़े मामले में विशेष जांच टीम (SIT) ने जांच तेज करते हुए उनके बयान दर्ज किए हैं और संबंधित ऑडियो रिकॉर्डिंग को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू की है।
उपेक्षा के बीच जी रहे दो मासूमों को मिला सुरक्षित वातावरण
उत्तरकाशी जिले के पुरोला विकासखंड में दो मासूम बच्चों का मामला जून 2025 में जिला बाल कल्याण समिति के संज्ञान में आया था। बच्चों की पारिवारिक परिस्थितियां बेहद चिंताजनक थीं।
उनकी मां घर छोड़कर जा चुकी थी, जबकि पिता मानसिक रूप से अस्वस्थ बताए गए। वहीं, करीब 80 वर्षीय मूकबधिर दादी गांव से भोजन जुटाकर किसी तरह अपना और बच्चों का भरण-पोषण कर रही थीं।
जिला बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष पुष्पा चौहान के अनुसार, जब वह अपनी टीम के साथ बच्चों से मिलने पहुंचीं तो चार वर्षीय बालक और तीन वर्षीय बालिका की स्थिति बेहद चिंताजनक थी।
दोनों बच्चे बोलना तक नहीं जानते थे। उचित देखभाल, संवाद और अनुकूल वातावरण के अभाव में उनका मानसिक और सामाजिक विकास प्रभावित हो रहा था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए समिति ने हस्तक्षेप किया और बच्चों को सुरक्षित संरक्षण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की।
पहाड़ी क्षेत्रों में चाइल्ड केयर संस्थानों, फिट फैसिलिटी और फोस्टर केयर जैसी व्यवस्थाओं की सीमित उपलब्धता के कारण पुनर्वास की व्यवस्था करना चुनौतीपूर्ण था।
इसके बावजूद समिति ने किशोर न्याय अधिनियम के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए विशिष्ट दत्तक ग्रहण एजेंसी को फिट फैसिलिटी घोषित किया।
इसके बाद नवंबर 2025 में दोनों बच्चों को रेस्क्यू कर सुरक्षित रूप से संस्थान पहुंचाया गया, जहां उनकी देखभाल और पुनर्वास की व्यवस्था की गई।
अब बोलना सीख रहे बच्चे, आंगनबाड़ी भी जाने लगे
संस्थान में सुरक्षित वातावरण और उचित देखभाल मिलने के बाद दोनों बच्चों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। अब वे बोलना सीख रहे हैं और दूसरे बच्चों के साथ खेलकूद में भाग ले रहे हैं। इसके साथ ही आंगनबाड़ी केंद्र जाकर शिक्षा और सामाजिक गतिविधियों से भी जुड़ रहे हैं।
बाल कल्याण समिति बच्चों के वर्तमान संरक्षण के साथ उनके भविष्य को सुरक्षित बनाने पर भी ध्यान दे रही है। इसी क्रम में उनकी पैतृक संपत्ति की सुरक्षा का मुद्दा उठाया गया है।
समिति की अध्यक्ष पुष्पा चौहान ने बताया कि इस संबंध में जिलाधिकारी को पत्र भेजकर पुरोला के उपजिलाधिकारी को आवश्यक निर्देश देने का अनुरोध किया गया है, ताकि बच्चों के पिता की ओर से जमीन बेचे जाने की स्थिति में नियमानुसार कार्रवाई की जा सके।
समिति का उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित बचपन देने के साथ उनके अधिकारों और भविष्य की संपत्ति की भी रक्षा सुनिश्चित करना है।
रेखा आर्या मामले में SIT की जांच तेज
दूसरी ओर, देहरादून में उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या से जुड़े मामले में विशेष जांच टीम ने जांच तेज कर दी है। एसआईटी ने रेखा आर्या के बयान दर्ज किए हैं। इसके साथ ही मामले से संबंधित ऑडियो रिकॉर्डिंग को भी जांच के लिए सुरक्षित किया गया है।
पुलिस के अनुसार, रिकॉर्डिंग को फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) भेजकर उसकी जांच कराई जाएगी। इसके बाद सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
रेखा आर्या की शिकायत पर देहरादून की कोतवाली कैंट में उनके पति गिरधारी लाल साहू के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
शिकायत में मारपीट, उत्पीड़न, शादी के समय पहली शादी की जानकारी छिपाने, अन्य महिलाओं से संबंध रखने और जान से मारने की धमकी देने जैसे आरोप लगाए गए हैं।
मामले में एससी/एसटी एक्ट सहित विभिन्न कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा रही है। इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
सोशल मीडिया वीडियो के बाद सुर्खियों में आया मामला
यह मामला उस समय सुर्खियों में आया, जब 15 सितंबर को रेखा आर्या ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया था।
वीडियो में वह भावुक होकर अपनी बात रखती नजर आई थीं। उन्होंने इसके साथ दो ऑडियो रिकॉर्डिंग भी जारी की थीं, जिनके बारे में उन्होंने कथित तौर पर अपने पति से संबंधित होने का दावा किया था।
रेखा आर्या का आरोप था कि उनके पति ने शादी के समय अपनी पहली शादी और बच्चों की जानकारी छिपाई थी। बाद में उन्हें इस बारे में पता चला। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पति के अन्य महिलाओं से संबंधों का विरोध करने पर उनके साथ मारपीट और गाली-गलौज की गई तथा जान से मारने की धमकी दी गई।
वीडियो सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति में भी मामला चर्चा का विषय बन गया। इसी दौरान रेखा आर्या की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें देहरादून के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
210 करोड़ की संपत्ति के आरोपों से भी गरमाई सियासत
विवाद के बीच गिरधारी लाल साहू ने भी सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर रेखा आर्या पर कथित तौर पर 210 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित करने के आरोप लगाए थे।
इसके बाद रेखा आर्या ने अस्पताल से अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इन आरोपों को निराधार बताया और मामले की जांच कराने की बात कही। उन्होंने आरोप लगाने वालों से सबूत सार्वजनिक करने की मांग भी की।
इस प्रकरण को लेकर कांग्रेस भी रेखा आर्या और भाजपा पर सवाल उठा रही है। हालांकि, संपत्ति से जुड़े आरोपों और दंपती के बीच लगाए गए अन्य आरोपों की सत्यता जांच तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल, एक ओर पुरोला के दो मासूम बच्चों को सुरक्षित भविष्य देने के प्रयास जारी हैं, तो दूसरी ओर रेखा आर्या से जुड़े मामले में एसआईटी साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है। दोनों मामलों में आगे की कार्रवाई संबंधित तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगी।




