उत्तराखंड में हरीश रावत का कमबैक। शहीदों को नमन से शुरू हुआ सफर, बीजेपी बोली- फ्लॉप रहा रोड शो
देहरादून। पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत के लंबे अंतराल के बाद उत्तराखंड लौटने से प्रदेश की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। दिल्ली में स्वास्थ्य लाभ लेने के बाद रावत ने रविवार को उत्तराखंड में वापसी की।
इस दौरान उन्होंने रामपुर तिराहा स्थित शहीद स्मारक से लेकर हरिद्वार और देहरादून तक कई पड़ाव किए। जगह-जगह कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया, जिसके बाद उनके इस दौरे को राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के तौर पर भी देखा गया।
हरीश रावत की वापसी ऐसे समय हुई है, जब उनके कांग्रेस में पदों से इस्तीफे और पार्टी में उनकी आगे की भूमिका को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही थीं। वापसी के दौरान रावत ने एक बार फिर बीजेपी सरकार को सीधे निशाने पर लिया और अपने कार्यकाल की जांच कराने की चुनौती दी।
शहीदों को श्रद्धांजलि से शुरू हुआ सफर
उत्तराखंड पहुंचने के बाद हरीश रावत ने सबसे पहले मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा स्थित शहीद स्मारक पहुंचकर राज्य आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद नारसन बॉर्डर, मंगलौर और रुड़की होते हुए उनका काफिला हरिद्वार पहुंचा। यहां उन्होंने शिवमूर्ति घाट पर मां गंगा का दुग्धाभिषेक किया।
इसके बाद रावत देहरादून पहुंचे, जहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। उनका काफिला कचहरी परिसर स्थित शहीद स्मारक पहुंचा, जहां उन्होंने उत्तराखंड आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
ईडी की कार्रवाई पर रावत का सरकार को खुला चैलेंज
हरीश रावत ने अपने निजी सचिव के घर ईडी की कार्रवाई को लेकर बीजेपी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अगर सरकार को उनके कार्यकाल या उनकी संपत्तियों को लेकर कोई संदेह है तो सभी जांच एजेंसियों को शामिल करते हुए एक कमीशन गठित कर दिया जाए।
रावत ने कहा कि उस कमीशन में ईडी, सीबीआई समेत सभी संबंधित विभागों को शामिल किया जाए और उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल के कामों की भी जांच कराई जाए। उन्होंने दावा किया कि अगर कोई गलत काम सामने आता है तो वह कार्रवाई के लिए तैयार हैं।
रावत ने यह भी कहा कि वह पार्टी के आदेश के अनुसार काम करने वाले व्यक्ति हैं और जल्द ही कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात कर आगे की भूमिका को लेकर अनुमति लेंगे।
इस्तीफे को लेकर भी दिया संदेश
देहरादून में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए रावत ने अपने पदों से इस्तीफा देने के मुद्दे पर भी बात की। उन्होंने कहा कि ईडी की कार्रवाई को लेकर बीजेपी द्वारा कांग्रेस पर सवाल उठाए जा रहे हैं, इसलिए उन्होंने कांग्रेस पर किसी तरह का भार न पड़े, इस उद्देश्य से सभी पदों से इस्तीफा देने की बात कही थी।
उन्होंने कहा कि वह पद पर रहें या न रहें, कांग्रेस कार्यकर्ता के तौर पर पार्टी के साथ चलते रहेंगे।
2027 को लेकर रावत का बड़ा बयान
रावत ने 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भी कार्यकर्ताओं के सामने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का सपना बिखर रहा है और यदि 2027 में फिर गलती हुई तो राज्य को संभालना मुश्किल हो सकता है। उन्होंने वंचित वर्गों की लड़ाई लड़ने की बात भी कही।
नौकरियों के मुद्दे पर बीजेपी के आरोपों का जवाब देते हुए रावत ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में नौकरियां देने का काम हुआ और नौकरी बेचने के आरोपों को लेकर उनके तीन साल के कार्यकाल की जांच के लिए भी कमीशन बनाया जा सकता है।
बीजेपी ने बताया ‘फ्लॉप रोड शो’
हरीश रावत के इस दौरे पर बीजेपी नेता जोत सिंह बिष्ट ने निशाना साधा। उन्होंने रावत के कार्यक्रम को ‘फ्लॉप रोड शो’ बताते हुए कहा कि उत्तराखंड में रावत के सामने चुनौती बीजेपी नहीं, बल्कि उनकी अपनी पार्टी है।
जोत सिंह बिष्ट ने दावा किया कि रावत प्रदेश की राजनीति में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कांग्रेस के भीतर ही उन्हें पर्याप्त स्थान नहीं मिल रहा है। उन्होंने कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा और हरीश रावत के बीच पुराने राजनीतिक मतभेदों का भी उल्लेख किया।
वापसी ने बढ़ाई कांग्रेस की अंदरूनी हलचल
हरीश रावत की वापसी के साथ सबसे बड़ा सवाल उनकी आगे की राजनीतिक भूमिका को लेकर है। लंबे समय तक उत्तराखंड से बाहर रहने, स्वास्थ्य लाभ लेने और फिर कांग्रेस के भीतर पदों से इस्तीफे की चर्चा के बीच उनका सार्वजनिक रूप से सक्रिय होना पार्टी की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे रहा है।
हालांकि रावत ने फिलहाल पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व से मुलाकात और उसकी अनुमति के बाद पार्टी के लिए काम करने की बात कही है। ऐसे में आने वाले दिनों में उनकी भूमिका और कांग्रेस के भीतर उनकी सक्रियता पर राजनीतिक नजरें बनी रहेंगी।

