गजब: एक शिक्षक को मिला राष्ट्रीय पुरस्कार, दूसरे स्कूल से गायब हुए शिक्षक निलंबित

एक शिक्षक को मिला राष्ट्रीय पुरस्कार, दूसरे स्कूल से गायब हुए शिक्षक निलंबित

रिपोर्ट- गिरीश चंदोला

देहरादून। शिक्षक दिवस पर उत्तराखंड से शिक्षा व्यवस्था की दो अलग-अलग तस्वीरें सामने आईं। चमोली के ज्योर्तिमठ विकासखंड के राजकीय जूनियर हाईस्कूल भलागांव में शिक्षक दिवस के दिन दोनों शिक्षक विद्यालय से अनुपस्थित मिले। वहीं, पौड़ी के नैनीडांडा विकासखंड के एक शिक्षक ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार हासिल कर पूरे उत्तराखंड का नाम रोशन किया।

शिक्षक दिवस पर स्कूल पहुंचे बच्चे, शिक्षक ही नहीं मिले

चमोली के राजकीय जूनियर हाईस्कूल भलागांव में पांच सितंबर को बच्चे शिक्षक दिवस मनाने की उम्मीद लेकर स्कूल पहुंचे थे। उनके साथ कई अभिभावक भी विद्यालय पहुंचे, लेकिन स्कूल में तैनात दोनों शिक्षक मौजूद नहीं थे। विद्यालय में शिक्षिका रेनू डंगवाल और प्रभारी प्रधानाध्यापक देवेंद्र लाल तैनात हैं।

शिक्षकों की गैरहाजिरी के कारण विद्यालय में शिक्षण व्यवस्था प्रभावित रही। मामले की जानकारी मिलने के बाद शिक्षा विभाग ने कार्रवाई की। जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक पंकज उप्रेती के मुताबिक, शिक्षिका रेनू डंगवाल को विद्यालय में अनुपस्थित पाए जाने पर निलंबित कर दिया गया है।

वहीं, प्रभारी प्रधानाध्यापक देवेंद्र लाल के संबंध में विभाग को जानकारी मिली है कि वह जनगणना ड्यूटी पर गए थे। इस दावे की पुष्टि के लिए तहसीलदार से रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट मिलने के बाद उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

ग्रामीणों ने उठाए शिक्षा व्यवस्था पर सवाल

एक ही दिन विद्यालय में तैनात दोनों शिक्षकों के अनुपस्थित रहने से ग्रामीणों और अभिभावकों में नाराजगी है। महिला मंगल दल की अध्यक्ष अंजना भट्ट ने कहा कि दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में पहले ही शिक्षा व्यवस्था कई चुनौतियों से जूझ रही है। ऐसे में शिक्षकों की गैरहाजिरी का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता है।

एक छात्रा ने भी आरोप लगाया कि स्कूल में कभी एक तो कभी दूसरा शिक्षक आता है। इसके चलते बच्चों को अपने पाठ्यक्रम की पूरी जानकारी तक नहीं हो पाती।

ग्रामीणों और अभिभावकों ने विद्यालय में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने की मांग की है।
दूसरी तस्वीर: राष्ट्रपति ने शिक्षक को किया सम्मानित
इसी शिक्षक दिवस पर उत्तराखंड के लिए गर्व का एक बड़ा पल भी आया।

पौड़ी जिले के नैनीडांडा विकासखंड स्थित राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय मुस्याखांद के प्रधानाध्यापक गबर सिंह बिष्ट को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2026 से सम्मानित किया।

नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति ने उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया। इस वर्ष विद्यालयी शिक्षा के क्षेत्र में पूरे उत्तराखंड से गबर सिंह बिष्ट को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार मिला है।

2003 से इसी स्कूल में दे रहे सेवाएं

गबर सिंह बिष्ट वर्ष 2003 से राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय मुस्याखांद में सेवाएं दे रहे हैं। दुर्गम क्षेत्र और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने बच्चों को बेहतर और आधुनिक शिक्षा देने पर लगातार जोर दिया।

उन्होंने गणित और विज्ञान जैसे विषयों को आसान और रोचक तरीके से पढ़ाने के साथ विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के लिए भी तैयार किया।

गांव के स्कूल में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा

गबर सिंह बिष्ट ने विद्यालय में डिजिटल शिक्षा और आईसीटी का प्रभावी इस्तेमाल किया। ई-कंटेंट और पीपीटी तैयार करने के साथ प्रोजेक्टर, डिजिटल बोर्ड और गूगल मीट जैसे माध्यमों से उन्होंने ग्रामीण बच्चों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने का प्रयास किया।

कोरोना काल में भी उन्होंने ऑनलाइन माध्यमों के जरिए विद्यार्थियों की पढ़ाई जारी रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

पहले भी मिल चुके हैं कई सम्मान

गबर सिंह बिष्ट को शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पहले राज्यपाल पुरस्कार और शैलेश मटियानी पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। अब राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार मिलने से उनके वर्षों के समर्पण और नवाचार को राष्ट्रीय पहचान मिली है।

मुख्य शिक्षाधिकारी अत्रेश सयाना ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि दूरस्थ क्षेत्र में रहकर शिक्षा के प्रति उनका समर्पण दूसरे शिक्षकों के लिए प्रेरणादायी और अनुकरणीय है।

शिक्षक दिवस पर सामने आया बड़ा विरोधाभास

एक ही दिन उत्तराखंड के दो सरकारी स्कूलों से सामने आई ये तस्वीरें शिक्षा व्यवस्था की अलग-अलग हकीकत दिखाती हैं।

एक तरफ चमोली में शिक्षक दिवस पर ही शिक्षकों की गैरहाजिरी सवाल खड़े करती है, तो दूसरी तरफ पौड़ी के शिक्षक गबर सिंह बिष्ट का समर्पण बताता है कि सीमित संसाधनों के बावजूद इच्छाशक्ति और नवाचार से ग्रामीण शिक्षा को नई दिशा दी जा सकती है।

एक तरफ लापरवाही पर कार्रवाई, दूसरी तरफ समर्पण को राष्ट्रीय सम्मान शिक्षक दिवस पर उत्तराखंड की ये दोनों तस्वीरें शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों और संभावनाओं, दोनों को सामने रखती हैं।