वन विभाग के संविदा कर्मियों को समान वेतन-EPF मामले में प्रमुख सचिव और हॉफ को अवमानना नोटिस
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने वन विभाग में वर्ष 2014-15 से संविदा और आउटसोर्स व्यवस्था के तहत कार्यरत कर्मचारियों को समान कार्य के लिए समान वेतन तथा ईपीएफ से जुड़े मामले में पूर्व के न्यायालयी आदेश का अनुपालन नहीं होने पर कड़ा रुख अपनाया है।
हाईकोर्ट ने अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए वन विभाग के प्रमुख सचिव आरके सुधांशु और प्रमुख वन संरक्षक एवं हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स (हॉफ) कपिल लाल को अवमानना नोटिस जारी किया है। दोनों अधिकारियों से 28 अक्टूबर तक जवाब दाखिल करने को कहा गया है।
मामले की सुनवाई मंगलवार को न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ में हुई। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 28 अक्टूबर की तारीख निर्धारित की है।
19 मार्च के आदेश के अनुपालन न करने का आरोप
मामला वन विभाग में संविदा पदों पर कार्यरत अर्जुन सिंह और अन्य कर्मचारियों की ओर से दायर अवमानना याचिका से जुड़ा है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि हाईकोर्ट की एकलपीठ ने 19 मार्च 2026 को उनके मामले में आदेश पारित किया था, लेकिन उसके बावजूद संबंधित अधिकारियों ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत कोई निर्णय नहीं लिया।
पूर्व आदेश में याचिकाकर्ताओं को दो सप्ताह के भीतर अपना प्रत्यावेदन सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा गया था। साथ ही सक्षम प्राधिकारी को निर्देश दिया गया था कि वह प्रत्यावेदन प्राप्त होने के तीन महीने के भीतर कानून के अनुसार निर्णय ले।
कर्मचारियों का आरोप है कि निर्धारित तीन महीने की अवधि बीत जाने के बाद भी उनके प्रत्यावेदन पर कोई आदेश पारित नहीं किया गया।
2014-15 से लगातार काम करने का दावा
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वे वर्ष 2014-15 से लगातार वन विभाग में कार्यरत हैं। उनका आरोप है कि एक जैसे कार्य करने के बावजूद उपनल के माध्यम से नियुक्त कर्मचारियों और आउटसोर्स एजेंसियों के जरिए तैनात कर्मचारियों के वेतन तथा सुविधाओं में अंतर किया जा रहा है।
कर्मचारियों ने 16 अगस्त 2017 को जारी शासनादेश का भी हवाला दिया है। याचिका में कहा गया है कि शासनादेश के अनुसार उपनल के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों और आउटसोर्स एजेंसियों के कर्मचारियों के साथ समान व्यवहार किए जाने की व्यवस्था है। इसके बावजूद आउटसोर्स कर्मचारियों को कथित तौर पर कम वेतन और सीमित सुविधाएं मिल रही हैं।
समान कार्य के लिए समान वेतन और EPF की मांग
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि एक ही प्रकृति का काम करने वाले उपनल कर्मचारियों को अधिक वेतन और अन्य सुविधाएं मिल रही हैं, जबकि आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से नियुक्त कर्मचारियों को कम भुगतान किया जा रहा है।
कर्मचारियों ने इसे सरकार की नीति और नियमों के विपरीत बताते हुए समान कार्य के लिए समान वेतन, ईपीएफ समेत अन्य लाभ देने की मांग की है।
कर्मचारियों का कहना है कि हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के बावजूद वन विभाग के संबंधित अधिकारियों की ओर से उनके प्रत्यावेदन पर निर्णय नहीं लिया गया। इसी आधार पर उन्होंने कोर्ट में अवमानना याचिका दायर करते हुए न्यायालय के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित कराने की मांग की।
28 अक्टूबर तक मांगा जवाब
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया पूर्व आदेश के अनुपालन से जुड़े सवालों को गंभीरता से लेते हुए प्रमुख सचिव आरके सुधांशु और हॉफ कपिल लाल को अवमानना नोटिस जारी किया है। दोनों अधिकारियों को 28 अक्टूबर तक अपना जवाब दाखिल करना होगा।
अब इस मामले में अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को होगी। उस दिन अधिकारियों के जवाब और पूर्व न्यायालयी आदेश के अनुपालन की स्थिति के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका सीधा संबंध वर्षों से वन विभाग में कार्यरत संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन, समानता और ईपीएफ जैसे सामाजिक सुरक्षा लाभों से जुड़ा है।


