बिग ब्रेकिंग: किच्छा खान फार्म विवाद मामले में हाईकोर्ट सख्त, पीड़ित परिवार को सुरक्षा देने के आदेश

किच्छा खान फार्म विवाद मामले में हाईकोर्ट सख्त, पीड़ित परिवार को सुरक्षा देने के आदेश

नैनीताल। उधम सिंह नगर जिले के किच्छा स्थित पिपलिया मोड़ के खान फार्म पर कथित कब्जे के विवाद में आज न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किए।

अदालत ने जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) और जिलाधिकारी (डीएम) को निर्देश दिया कि पीड़ित पक्ष, वहां मौजूद महिलाओं, बच्चों और पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। साथ ही राज्य सरकार और अन्य पक्षकारों को तीन सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए गए।

सुनवाई के दौरान पूर्व आदेश के अनुपालन में किच्छा के एसडीएम गौरव पांडे और एसएचओ रवि कुमार व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हुए।

अधिकारियों ने कोर्ट को बताया कि फार्म पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से भारतीय न्याय संहिता की धारा 164 के तहत कार्रवाई की गई थी, क्योंकि उस समय क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई थी।

अधिकारियों ने यह भी कहा कि जैसे ही उन्हें हाईकोर्ट और सिविल कोर्ट के आदेश प्राप्त हुए, धारा 164 के तहत की गई कार्रवाई रोक दी गई। इसके बाद याचिकाकर्ताओं को संपत्ति पर कब्जा दिलाने के साथ आवश्यक सुरक्षा भी उपलब्ध करा दी गई।

अधिकारियों के अनुसार, पहले उन्हें सिविल कोर्ट के स्थगन आदेश (स्टे ऑर्डर) की प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई थी, जिससे वास्तविक स्वामित्व को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी।

इस पर हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दौरान प्रशासन को अत्यंत सतर्कता के साथ कार्य करना चाहिए।

अदालत ने कहा कि सोशल मीडिया के दौर में छोटी घटनाएं भी तेजी से बड़ा रूप ले सकती हैं, इसलिए प्रशासन को संवेदनशील मामलों में संतुलित और सावधानीपूर्ण रवैया अपनाना चाहिए।

क्या है पूरा मामला?

याचिकाकर्ता सिकंदर आलम खान ने हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा है कि किच्छा के पिपलिया मोड़ स्थित कुलसुम खान फार्म को लेकर स्वामित्व विवाद चल रहा है। उनके अनुसार वर्ष 2024 में कुलसुम खान ने अपनी पंजीकृत वसीयत अपनी रिश्तेदार सायरा वाड्रा और याचिकाकर्ता सिकंदर आलम खान के नाम की थी।

कुलसुम खान का निधन 18 दिसंबर 2025 को हो गया।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि कुलसुम खान के निधन के बाद दूसरे पक्ष नसरीन सांगा अपने समर्थकों के साथ फार्म पर पहुंचीं और प्रशासन की मिलीभगत से कब्जा कर लिया गया।

आरोप है कि फार्म में रह रहे पुरुषों को बाहर निकाल दिया गया, जबकि महिलाओं, बच्चों और बेजुबान पशुओं को भी कठिन परिस्थितियों में रखा गया।

याचिकाकर्ता का कहना है कि उनके पास पंजीकृत वसीयत और 11 जून 2026 को सिविल कोर्ट से प्राप्त स्थगन आदेश मौजूद था, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन ने आदेश का पालन नहीं किया और दूसरे पक्ष को कब्जा दिला दिया। इसी के बाद हाईकोर्ट में हस्तक्षेप की मांग करते हुए न्याय की गुहार लगाई गई।

अब मामले में हाईकोर्ट ने पीड़ित पक्ष की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए राज्य सरकार और अन्य संबंधित पक्षों से तीन सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई जवाब दाखिल होने के बाद होगी।