बिग ब्रेकिंग: हाईकोर्ट ने उपनल और आउटसोर्स कर्मचारियों को दी राहत, प्रोत्साहन राशि की रिकवरी पर लगाई रोक

हाईकोर्ट ने उपनल और आउटसोर्स कर्मचारियों को दी राहत, प्रोत्साहन राशि की रिकवरी पर लगाई रोक

  • राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक को 10 सप्ताह में प्रत्यावेदन पर निर्णय लेने के निर्देश, तब तक नहीं होगी वसूली

नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने प्रदेश के सरकारी विभागों में उपनल के अलावा अन्य एजेंसियों के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए उनकी प्रोत्साहन राशि की रिकवरी पर अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों के प्रत्यावेदन पर निर्णय होने तक उनसे किसी प्रकार की वसूली नहीं की जाएगी।

वरिष्ठ न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने इस मामले से संबंधित सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की।

सुनवाई के बाद न्यायालय ने राजाजी टाइगर रिजर्व (पूर्व में राजाजी नेशनल पार्क) के निदेशक को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले प्रत्यावेदनों पर कानून के अनुसार 10 सप्ताह के भीतर निर्णय लिया जाए।

वहीं कर्मचारियों को निर्देश दिया गया कि वे 10 दिन के भीतर अपना प्रत्यावेदन संबंधित अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करें।

याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि राज्य गठन के बाद वर्ष 2014 और 2016 में उन्हें विभिन्न बाहरी एजेंसियों के माध्यम से नियुक्त किया गया था। बाद में अलग-अलग एजेंसियों के जरिए उनका सेवा विस्तार होता रहा और वर्ष 2019 से उन्हें उपनल कर्मचारी के रूप में माना गया। तब से वे लगातार विभाग में सेवाएं दे रहे हैं।

याचिका में आरोप लगाया गया कि अब राज्य सरकार उन्हें यह कहते हुए उपनल कर्मचारियों का लाभ देने से इनकार कर रही है कि उनकी प्रारंभिक नियुक्ति उपनल के माध्यम से नहीं हुई थी, बल्कि अन्य एजेंसियों के जरिए हुई थी।

इसी आधार पर पूर्व में दी गई प्रोत्साहन राशि की रिकवरी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई, जिसे चुनौती दी गई थी।
सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय ने कहा कि जब तक कर्मचारियों के प्रत्यावेदन पर सक्षम प्राधिकारी निर्णय नहीं ले लेता, तब तक उनसे प्रोत्साहन राशि की कोई रिकवरी नहीं की जाएगी। इसके साथ ही न्यायालय ने याचिकाओं का निस्तारण कर दिया।