कांग्रेस के बड़े वादे, धामी सरकार के 5 साल का जश्न और UKD की राजनीति ने बदला सियासी माहौल
देहरादून। उत्तराखंड में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश का राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। सत्ता पक्ष अपनी उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने की तैयारी में जुटा है, जबकि विपक्ष सरकार को महंगाई, बेरोजगारी और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर घेर रहा है। इसी बीच स्थानीयता बनाम बाहरी लोगों का मुद्दा भी सियासी बहस के केंद्र में आ गया है।
कांग्रेस ने चंपावत जिले के लोहाघाट से अपनी ‘परिवर्तन संकल्प यात्रा’ के जरिए चुनावी अभियान को धार दी। जनसभा को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने भाजपा सरकार पर महंगाई, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और पेपर लीक जैसे मामलों में निशाना साधा।
उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने पर अग्निवीर योजना को समाप्त करने, पुरानी पेंशन योजना बहाल करने और टीईटी की बाध्यता खत्म करने जैसे फैसले किए जाएंगे। कार्यक्रम के दौरान 100 से अधिक लोगों ने कांग्रेस की सदस्यता भी ग्रहण की।
दूसरी ओर भाजपा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मुख्यमंत्री पद पर पांच वर्ष पूरे होने को ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करने की तैयारी कर रही है। 4 जुलाई 2026 को धामी का पांच साल का कार्यकाल पूरा होगा।
भाजपा का कहना है कि उत्तराखंड गठन के बाद पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के बाद धामी पहले मुख्यमंत्री होंगे, जिन्होंने लगातार पांच साल तक प्रदेश की कमान संभाली है। पार्टी इस अवसर पर पूरे प्रदेश में सप्ताहभर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बना रही है।
हालांकि कांग्रेस ने भाजपा के प्रस्तावित जश्न पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार को अपनी उपलब्धियों के बजाय प्रदेश में बढ़ती बेरोजगारी, पेपर लीक, खनन, महिलाओं के खिलाफ अपराध और पलायन जैसे मुद्दों का जवाब देना चाहिए।
इधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचत की अपील को उत्तराखंड भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता नवीन ठाकुर ने अपने जीवन का हिस्सा बना लिया है। वे पिछले डेढ़ महीने से रोजाना सहसपुर से देहरादून स्थित भाजपा कार्यालय तक लगभग 74 किलोमीटर साइकिल से सफर कर रहे हैं। अब तक वे चार हजार किलोमीटर से अधिक साइकिल चला चुके हैं।
उनका कहना है कि यह केवल ईंधन बचत नहीं, बल्कि ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण का अभियान है। उनके इस प्रयास की केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा भी सराहना कर चुके हैं।
इस बीच प्रदेश की राजनीति में स्थानीयता और बाहरी लोगों का मुद्दा भी तेजी से उभर रहा है। हाल के महीनों में निहंग विवाद, पर्यटकों से जुड़े घटनाक्रम और कानून-व्यवस्था के मामलों के बाद उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) ने इसे प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बना दिया है।
यूकेडी का आरोप है कि राज्य सरकार उत्तराखंड के लोगों के हितों और सम्मान की रक्षा करने में विफल रही है, जबकि भाजपा इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए प्रदेश की सामाजिक एकता बनाए रखने की बात कह रही है।
इस बार उत्तराखंड की राजनीति केवल हिंदुत्व या राष्ट्रीय मुद्दों तक सीमित नहीं रह सकती। रोजगार, कानून-व्यवस्था, स्थानीयता, क्षेत्रीय पहचान और विकास जैसे मुद्दे आगामी विधानसभा चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
ऐसे में सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीति के साथ चुनावी मैदान में उतर चुके हैं और आने वाले महीनों में प्रदेश की सियासत और अधिक गर्माने के संकेत मिल रहे हैं।


