बड़ी खबर: भ्रष्टाचार उजागर करने की सजा? ACR ग्रेडिंग घटाने के खिलाफ CAT पहुंचे संजीव चतुर्वेदी

भ्रष्टाचार उजागर करने की सजा? ACR ग्रेडिंग घटाने के खिलाफ CAT पहुंचे संजीव चतुर्वेदी

देहरादून। उत्तराखंड कैडर के वरिष्ठ भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी संजीव चतुर्वेदी की वार्षिक गोपनीय आख्या (ACR) की ग्रेडिंग कम किए जाने का मामला अब सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) पहुंच गया है।

चतुर्वेदी ने आरोप लगाया है कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को उजागर करने के बाद उनकी ACR ग्रेडिंग बिना पर्याप्त आधार के कम कर दी गई।

मामले की सुनवाई करते हुए CAT ने उत्तराखंड सरकार के प्रमुख सचिव (वन), मुख्य सचिव और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) को नोटिस जारी कर छह सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

19 जून को हुई सुनवाई

यह मामला 19 जून को CAT में न्यायिक सदस्य जस्टिस राजवीर सिंह वर्मा की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया। वर्तमान में हल्द्वानी स्थित उत्तराखंड फॉरेस्ट्री ट्रेनिंग एकेडमी (UFTA) के निदेशक के रूप में कार्यरत संजीव चतुर्वेदी ने वित्तीय वर्ष 2024-25 की अपनी ACR ग्रेडिंग को चुनौती दी है।

याचिका के अनुसार, उनकी ग्रेडिंग 9.74 से घटाकर 9.30 कर दी गई, जिसे उन्होंने मनमाना और अनुचित बताया है।

प्रतिशोधात्मक कार्रवाई का आरोप

चतुर्वेदी का दावा है कि उनकी ग्रेडिंग में कटौती प्रदर्शन या प्रशासनिक कारणों से नहीं, बल्कि उनके द्वारा उठाए गए कथित भ्रष्टाचार के मुद्दों के कारण की गई।

याचिका में कहा गया है कि पिछले वर्ष उन्होंने वन विभाग से जुड़े कई कथित घोटालों और अनियमितताओं को उजागर किया था, जिसके बाद उनके खिलाफ प्रतिकूल कार्रवाई की गई।

उन्होंने अपनी पूर्व रिपोर्टिंग अधिकारी की टिप्पणियों का भी हवाला दिया है। इन टिप्पणियों में उन्हें ईमानदार, नवाचार को बढ़ावा देने वाला और परिणामोन्मुख अधिकारी बताया गया है।

रिपोर्ट में वन प्रबंधन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग को प्रोत्साहित करने, जैव विविधता संरक्षण के प्रयासों और मुनस्यारी में राज्य के पहले बुरांश गार्डन की स्थापना जैसी पहलों की सराहना की गई है।

मुनस्यारी इको-हट मामले का भी उल्लेख

याचिका में दिसंबर 2024 की उस जांच रिपोर्ट का भी जिक्र किया गया है, जिसे चतुर्वेदी ने मुनस्यारी क्षेत्र में इको-हट निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं के संबंध में तैयार किया था।

रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि निर्माण सामग्री की खरीद प्रक्रिया में फर्जी कंपनियों के कोटेशन का इस्तेमाल किया गया। साथ ही, इको-हट परियोजना से प्राप्त आय को एक गैर-पंजीकृत निजी कंपनी के खाते में स्थानांतरित किए जाने का भी दावा किया गया।

चतुर्वेदी ने अपनी जांच रिपोर्ट में मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) से कराने की सिफारिश की थी।

छह सप्ताह में दाखिल करना होगा जवाब

CAT द्वारा जारी नोटिस के बाद प्रमुख सचिव (वन), मुख्य सचिव और PCCF को छह सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रखना होगा। अब ट्रिब्यूनल में सुनवाई का मुख्य मुद्दा यह रहेगा कि ACR ग्रेडिंग में की गई कमी सामान्य प्रशासनिक मूल्यांकन का हिस्सा थी या फिर, जैसा कि चतुर्वेदी का आरोप है, यह कथित रूप से प्रतिशोधात्मक कार्रवाई का मामला है।