बाजपुर हत्याकांड में उम्रकैद घटाकर 7 साल, पथरी अतिक्रमण मामले में जवाब तलब
नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने उधम सिंह नगर के बाजपुर क्षेत्र में वर्ष 2021 में हुए मोहम्मद रफी हत्याकांड से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में आरोपी विक्की उर्फ मंगल सिंह को बड़ी राहत दी है। न्यायालय ने हत्या के मामले में दी गई उम्रकैद की सजा को संशोधित करते हुए गैर-इरादतन हत्या में परिवर्तित कर दिया है।
न्यायमूर्ति रवीन्द्र मैठाणी एवं न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने आरोपी को सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
मामले के अनुसार, 17 मार्च 2021 को बाजपुर स्थित राणा फार्म में मोहम्मद रफी और आरोपी विक्की उर्फ मंगल सिंह के बीच विवाद हो गया था।
अभियोजन के अनुसार, विवाद के दौरान आरोपी ने लकड़ी के डंडे से मोहम्मद रफी के सिर पर वार कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। इसके बाद आरोपी के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था।
सत्र न्यायालय, उधम सिंह नगर ने वर्ष 2024 में आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया था। इस निर्णय को आरोपी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
अपील में तर्क दिया गया कि घटना पूर्व नियोजित नहीं थी, बल्कि अचानक हुए विवाद का परिणाम थी तथा आरोपी की हत्या करने की मंशा नहीं थी।
न्यायालय ने पाया कि आरोपी और मृतक के बीच कोई पुरानी शत्रुता सिद्ध नहीं हुई तथा घटना के दौरान केवल एक घातक वार किया गया था। न्यायालय के अनुसार परिस्थितियां यह नहीं दर्शातीं कि आरोपी ने पूर्व योजना बनाकर हत्या की हो या उसने असामान्य क्रूरता का प्रदर्शन किया हो।
पथरी में नाले पर अतिक्रमण मामले में पुनर्वास विभाग से जवाब तलब
इसी बीच, हाईकोर्ट ने हरिद्वार के पथरी क्षेत्र में टिहरी विस्थापित दो गांवों से होकर गुजरने वाले नाले पर अतिक्रमण कर उसे पाटने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने पुनर्वास विभाग को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई भी चार सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।
याचिकाकर्ता गुरदीप सिंह ने अपनी जनहित याचिका में आरोप लगाया है कि पथरी क्षेत्र में नाले पर अतिक्रमण कर उसे खेतों में मिला दिया गया है, जिससे मानसून के दौरान जलभराव का खतरा बढ़ गया है।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि यदि नाले को तत्काल नहीं खोला गया तो बारिश के दौरान पानी खेतों और आसपास के घरों में घुस सकता है। इस पर अदालत ने कहा कि पुनर्वास विभाग का जवाब आने तक अस्थायी तौर पर नाले का संचालन सुनिश्चित किया जाए।


