ANM/GNM ग्रेड पे याचिकाएं खारिज, भागीरथी इको सेंसिटिव जोन पर सुनवाई टली
नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने मंगलवार को दो महत्वपूर्ण मामलों में सुनवाई करते हुए एक ओर एएनएम/जीएनएम स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की 2800 रुपये ग्रेड पे की मांग को खारिज कर दिया।
वहीं दूसरी ओर उत्तरकाशी के भागीरथी इको सेंसिटिव जोन में कथित अवैध निर्माणों को लेकर दायर जनहित याचिका पर अगली सुनवाई जुलाई के तीसरे सप्ताह के लिए तय की है।
एएनएम/जीएनएम को 2800 रुपये ग्रेड पे देने की मांग खारिज
न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की ओर से दायर याचिकाओं को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि वर्ष 2013 से पहले नियुक्त एएनएम/जीएनएम कर्मियों को 2800 रुपये ग्रेड पे केवल न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में व्यक्तिगत वेतन (पर्सनल पे) के रूप में दिया गया था।
अदालत ने कहा कि वर्ष 2013 के बाद नियुक्त स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के लिए लागू सेवा नियमों के अनुसार 2000 रुपये ग्रेड पे निर्धारित है और इसमें हस्तक्षेप का कोई औचित्य नहीं बनता।
याचिकाकर्ता सुधा पांडे समेत अन्य ने तर्क दिया था कि उनकी शैक्षणिक योग्यता और कार्य दायित्व वर्ष 2013 से पहले नियुक्त स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के समान हैं, इसलिए उन्हें भी 2800 रुपये ग्रेड पे का लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने 2 मई 2013 के शासनादेश और वर्ष 2016 के सेवा नियमों को चुनौती दी थी।
सरकार का पक्ष
राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि जिन विज्ञापनों के आधार पर याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति हुई, उनमें स्पष्ट रूप से 2000 रुपये ग्रेड पे का उल्लेख था। नियुक्ति स्वीकार करने और वर्षों तक सेवा करने के बाद वे अब उस वेतनमान को चुनौती नहीं दे सकते।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि 2800 रुपये ग्रेड पे स्वास्थ्य पर्यवेक्षक पद के लिए निर्धारित है और पूर्व में नियुक्त कुछ कर्मचारियों को यह विशेष परिस्थितियों में व्यक्तिगत वेतन के रूप में दिया गया था।
अदालत की अहम टिप्पणी
हाईकोर्ट ने कहा कि वेतनमान तय करना मुख्य रूप से कार्यपालिका का विषय है और न्यायालय सामान्य परिस्थितियों में इसमें हस्तक्षेप नहीं करता।
अदालत ने माना कि वर्ष 2013 से पहले और उसके बाद नियुक्त कर्मचारियों के बीच किया गया वर्गीकरण ऐतिहासिक और वैधानिक आधार पर है। इसे मनमाना या भेदभावपूर्ण नहीं कहा जा सकता।
कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं का वेतनमान नियुक्ति के बाद कम नहीं किया गया है, बल्कि उन्हें वही वेतनमान दिया जा रहा है, जिसका उल्लेख सेवा नियमों और भर्ती विज्ञापन में था। ऐसे में “समान कार्य के लिए समान वेतन” के आधार पर 2800 रुपये ग्रेड पे की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती।
भागीरथी इको सेंसिटिव जोन में अवैध निर्माणों पर जुलाई में अगली सुनवाई
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने भागीरथी नदी के इको सेंसिटिव जोन में कथित अवैध निर्माणों को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मामले की अगली तिथि जुलाई के तीसरे सप्ताह के लिए निर्धारित की है।
याचिकाकर्ता ने जताई आपदा की आशंका
हिमालयन नागरिक दृष्टि मंच की ओर से नागेंद्र जगूड़ी ने जनहित याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि भागीरथी इको सेंसिटिव जोन में नियमों की अनदेखी करते हुए बड़े पैमाने पर होटल, रिजॉर्ट और अन्य व्यावसायिक निर्माण किए गए हैं।
याचिका में कहा गया है कि इन निर्माणों के कारण भविष्य में नदी का प्रवाह प्रभावित हो सकता है, जिससे धराली जैसी आपदा की पुनरावृत्ति का खतरा बढ़ सकता है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि मानसून शुरू होने वाला है, लेकिन कथित अवैध निर्माणों के खिलाफ अभी तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। इस कारण मामले की शीघ्र सुनवाई की मांग की गई।
एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के उल्लंघन का आरोप
याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रशासन ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण और भारत का सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों की अनदेखी करते हुए इको सेंसिटिव और बाढ़ संभावित क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति दी है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि नदी क्षेत्र से 200 मीटर की दूरी तक निर्माण कार्य प्रतिबंधित है, इसके बावजूद नदी किनारे अतिक्रमण और निर्माण कार्य जारी हैं।
याचिका में भागीरथी नदी के तटवर्ती क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाने, अवैध रिजॉर्ट बंद करने और इको सेंसिटिव जोन से संबंधित नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
गौरतलब है कि अगस्त 2025 में उत्तरकाशी के धराली क्षेत्र में खीरगंगा गाड़ में आई बाढ़ और मलबे के कारण भारी तबाही हुई थी, जिसमें कई लोगों की जान गई और धराली बाजार को व्यापक नुकसान पहुंचा था।


