बिग ब्रेकिंग: उत्तराखंड हाईकोर्ट के दो बड़े फैसले। अल्पसंख्यक कल्याण सचिव तलब, न्यायिक अधिकारियों को बड़ी राहत

उत्तराखंड हाईकोर्ट के दो बड़े फैसले। अल्पसंख्यक कल्याण सचिव तलब, न्यायिक अधिकारियों को बड़ी राहत

नैनीताल। Uttarakhand High Court ने मंगलवार को दो महत्वपूर्ण मामलों में अहम फैसले सुनाते हुए एक ओर सरकारी विभागों को न्यायालय के आदेशों के पालन के प्रति सख्त संदेश दिया, वहीं दूसरी ओर उच्चतर न्यायिक सेवा के 35 अधिकारियों को चयन ग्रेड प्रदान कर बड़ी राहत दी।

प्राइमरी मदरसों में स्पेशल स्कीम के तहत नियुक्त शिक्षकों को वर्ष 2016 से नियमित वेतन और अन्य देयकों का भुगतान नहीं किए जाने के मामले में न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने सचिव, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को दोबारा अवमानना नोटिस जारी किया है।

अदालत ने सचिव को 11 अगस्त तक जवाब दाखिल करने के निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई भी इसी तारीख पर तय की है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि वर्ष 2023 में हाईकोर्ट ने तीन सदस्यीय समिति गठित कर चार माह के भीतर शिक्षकों के प्रपत्रों की जांच करते हुए उनके लंबित देयकों का भुगतान करने के आदेश दिए थे। इसके बावजूद अब तक न तो समिति का गठन किया गया और न ही भुगतान की प्रक्रिया शुरू हुई।

हरिद्वार निवासी संजय और अन्य शिक्षकों द्वारा दायर अवमानना याचिका में कहा गया है कि वर्ष 2006 से 2008 के बीच प्राथमिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए उन्हें स्पेशल स्कीम के तहत मदरसों में नियुक्त किया गया था।

वर्ष 2016 के बाद से उन्हें नियमित वेतन और अन्य देयकों का भुगतान नहीं किया गया, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

वहीं, हाईकोर्ट ने उत्तराखंड उच्चतर न्यायिक सेवा नियमावली, 2004 के नियम-27 के तहत राज्य के 35 न्यायिक अधिकारियों को ₹1,63,030 से ₹2,19,090 (जे-6) वेतनमान का चयन ग्रेड प्रदान किया है।

हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल योगेश कुमार गुप्ता द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, अधिकांश अधिकारियों को यह लाभ वर्ष 2020 से प्रभावी होगा, जबकि कुछ अधिकारियों के लिए प्रभावी तिथि अलग-अलग निर्धारित की गई है।

चयन ग्रेड प्राप्त करने वालों में जिला एवं सत्र न्यायाधीश, पारिवारिक न्यायालयों के प्रधान न्यायाधीश, श्रम न्यायालयों के पीठासीन अधिकारी और विभिन्न विधिक निकायों में प्रतिनियुक्ति पर तैनात अधिकारी शामिल हैं।

इनमें विजयांत कुमार, धर्म सिंह, सुबीर कुमार, नीतू जोशी, विंध्याचल सिंह, मनीष मिश्रा, पंकज तोमर, राहुल गर्ग, नीना अग्रवाल, मोनिका मित्तल, शादाब बानो, प्रदीप कुमार मणी और अनिरुद्ध भट्ट सहित कुल 35 अधिकारियों के नाम शामिल हैं।

हाईकोर्ट के इन दोनों फैसलों को न्यायिक जवाबदेही और न्यायिक सेवा हितों की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक तरफ अदालत ने अपने आदेशों की अनदेखी पर सख्ती दिखाई है, तो दूसरी ओर न्यायिक अधिकारियों के सेवा लाभ सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम उठाया है।