LUCC चिटफंड घोटाले में मुंबई से दो मुख्य आरोपी गिरफ्तार
देहरादून। उत्तराखंड के बहुचर्चित LUCC (लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी) चिटफंड घोटाले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को बड़ी सफलता मिली है।
एजेंसी ने मामले के दो प्रमुख आरोपियों को मुंबई से गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि राज्य के एक लाख से अधिक निवेशकों से करीब 800 करोड़ रुपये जमा कराए गए थे, जिनके गबन और दुरुपयोग के आरोप हैं।
सीबीआई के अनुसार दोनों आरोपियों को 1 जून 2026 को महाराष्ट्र के मुंबई से गिरफ्तार किया गया। यह कार्रवाई वित्तीय दस्तावेजों के विश्लेषण, बैंकिंग लेन-देन की जांच, गवाहों के बयान और विभिन्न राज्यों में किए गए व्यापक फील्ड इन्वेस्टिगेशन के बाद की गई।
हाईकोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ था मामला
यह मामला उत्तराखंड हाईकोर्ट के 17 सितंबर 2025 के आदेश के अनुपालन में सीबीआई को सौंपा गया था। इसके बाद सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) देहरादून ने 26 नवंबर 2025 को विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर राज्य पुलिस द्वारा पहले से दर्ज 18 एफआईआर की जांच अपने हाथ में ली थी।
जांच में आरोप है कि LUCC और उससे जुड़े पदाधिकारियों ने अनियमित जमा योजनाओं के माध्यम से लोगों से अवैध रूप से धन एकत्र किया और निवेशकों के साथ धोखाधड़ी की।
एक लाख से अधिक निवेशक बने शिकार
सीबीआई की जांच में खुलासा हुआ है कि एक लाख से अधिक निवेशकों को आकर्षक रिटर्न का लालच देकर विभिन्न जमा योजनाओं में निवेश कराया गया। इन योजनाओं के जरिए लगभग 800 करोड़ रुपये एकत्र किए गए, जिनके गबन और दुरुपयोग की आशंका जताई गई है।
एजेंसी का दावा है कि गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपी पूरे नेटवर्क के प्रमुख संचालकों में शामिल थे और धन संग्रह, फंड प्रबंधन, धन के डायवर्जन तथा कथित गबन में उनकी सक्रिय भूमिका के साक्ष्य मिले हैं।
पहले भी हो चुकी हैं गिरफ्तारियां
सीबीआई इससे पहले 12 और 13 मई 2026 को पांच अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें LUCC के तीन वरिष्ठ सहकारी प्रमोटर भी शामिल थे। ये आरोपी उत्तराखंड में जमा राशि जुटाने और विभिन्न शाखाओं के संचालन में अहम भूमिका निभा रहे थे। वर्तमान में सभी पांच आरोपी देहरादून की सुधोवाला जेल में न्यायिक हिरासत में हैं।
संपत्तियां फ्रीज करने की तैयारी
जांच के दौरान सीबीआई ने आरोपियों द्वारा कथित रूप से अपराध की आय से खरीदी गई कई अचल संपत्तियों का भी पता लगाया है।
इन संपत्तियों का विवरण उत्तराखंड सरकार के वित्त सचिव को भेजा गया है ताकि BUDS Act के तहत उन्हें फ्रीज कर पीड़ित निवेशकों को राहत दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जा सके।
सीबीआई का कहना है कि हालिया गिरफ्तारियां इस बहुचर्चित घोटाले की बड़ी साजिश को उजागर करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हैं। मामले की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है और आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है।

