बड़ी खबर: कोर्ट के फैसले से तीर्थ पुरोहितों में खुशी, रजिस्ट्रेशन अव्यवस्था से यात्री बेहाल

कोर्ट के फैसले से तीर्थ पुरोहितों में खुशी, रजिस्ट्रेशन अव्यवस्था से यात्री बेहाल

रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड में एक ओर केदारनाथ धाम से जुड़े हक-हकूकों के मामले में तीर्थ पुरोहितों को बड़ी न्यायिक राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर चारधाम यात्रा में बढ़ती भीड़ और अव्यवस्थाओं के कारण श्रद्धालुओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

केदारनाथ धाम से जुड़े बहुचर्चित मामले में सिविल जज जूनियर डिवीजन ऊखीमठ ने पंच पंडा समिति रुद्रपुर के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) को बड़ा झटका दिया है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि बीकेटीसी अब रुद्रपुर के तीर्थ पुरोहितों को केदारनाथ धाम और उससे जुड़े सहयोगी मंदिरों के गर्भगृह में अपने यजमानों के अभिषेक, संकल्प, परिक्रमा और रुद्री पाठ कराने से नहीं रोक सकेगी।

न्यायालय ने यह भी कहा कि तीर्थ पुरोहित मंदिर परिसर में अपने यजमानों से भेंट, दक्षिणा और उपहार ग्रहण कर सकेंगे तथा उनके पारंपरिक अधिकारों पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता।

वर्ष 2023 से चल रहे इस मामले में पंच पंडा समिति रुद्रपुर के अध्यक्ष अमित शुक्ला वादी थे। समिति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुशील भट्ट, आनंद बजवाल और हार्दिक रावत ने ऐतिहासिक दस्तावेजों और पुराने अभिलेखों के आधार पर प्रभावी पैरवी की।

फैसले के बाद तीर्थ पुरोहितों और स्थानीय लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। ऊखीमठ के ब्लॉक प्रमुख पंकज शुक्ला ने इसे “सत्य और परंपरा की जीत” बताया।

लोगों का कहना है कि बाबा केदारनाथ के दरबार में आखिरकार न्याय की जीत हुई है। माना जा रहा है कि यह फैसला भविष्य में तीर्थ पुरोहितों के पारंपरिक अधिकारों से जुड़े मामलों में बड़ी मिसाल बनेगा।

उधर, चारधाम यात्रा 2026 में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने प्रशासन की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। हरिद्वार के ऋषिकुल मैदान स्थित अस्थाई रजिस्ट्रेशन सेंटर में पिछले दो दिनों से भारी भीड़ उमड़ रही है।

केदारनाथ और यमुनोत्री धाम में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के कारण प्रशासन ने सीमित संख्या में ही रजिस्ट्रेशन करने का फैसला लिया। मंगलवार दोपहर दो बजे रजिस्ट्रेशन काउंटर बंद कर दिए गए, जिससे हजारों श्रद्धालुओं को निराश होकर लौटना पड़ा।

श्रद्धालुओं ने आरोप लगाया कि वे पूरी रात लाइन में खड़े रहे, लेकिन बिना सूचना के काउंटर बंद कर दिए गए। राजस्थान से आई बुजुर्ग महिला प्रेमा देवी ने बताया कि उनके साथ 27 लोग आए हैं, लेकिन दो दिन से रजिस्ट्रेशन नहीं हो पा रहा है।

वहीं छत्तीसगढ़ से आए भरातुराम साहू ने कहा कि उनके साथ करीब 95 लोग हैं और हरिद्वार में रुकने-खाने की समस्या गंभीर हो गई है। झारखंड से आए फुलेश्वर ने भी प्रशासन से बेहतर व्यवस्था की मांग की।

जिला पर्यटन अधिकारी सुशील नौटियाल ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए दोपहर दो बजे रजिस्ट्रेशन बंद किए गए थे और अगले दिन सुबह फिर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उन्होंने दावा किया कि रजिस्ट्रेशन सेंटर पर पेयजल, शौचालय, टैंट और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

इधर, ऋषिकेश आईएसबीटी में भी हालात बेकाबू नजर आए। पंजीकरण और रोडवेज टिकट काउंटरों पर यात्रियों की लंबी कतारें लगी रहीं।

भीड़ और गर्मी के बीच मंगलवार को एक महिला तीर्थयात्री अचानक बेहोश होकर गिर पड़ी, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद लोगों ने महिला को बाहर निकालकर प्राथमिक उपचार दिलाया।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अत्यधिक गर्मी, उमस और घंटों लाइन में खड़े रहने के कारण महिला की तबीयत बिगड़ गई थी। ऋषिकेश कोतवाल कैलाश चंद्र भट्ट ने स्पष्ट किया कि महिला भीड़ और थकान के कारण बेहोश हुई थी तथा हाथापाई की खबरें भ्रामक हैं।

लगातार बढ़ती भीड़ के बीच चारधाम यात्रा में व्यवस्थाएं बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। श्रद्धालुओं ने अतिरिक्त काउंटर बढ़ाने, भीड़ प्रबंधन मजबूत करने और यात्रियों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।