नकली दवाओं का बड़ा खेल बेनकाब। 24 दवाएं क्वालिटी टेस्ट में फेल, 40 फार्मा यूनिट्स के लाइसेंस सस्पेंड
देहरादून। उत्तराखंड में फार्मा इंडस्ट्री एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की अप्रैल रिपोर्ट में राज्य में बनी 24 दवाओं के सैंपल फेल पाए गए हैं।
इसी बीच एसटीएफ ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर नकली दवाइयां बेचने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
जांच में सामने आया है कि हरिद्वार, रुड़की और कोटद्वार की बंद फैक्ट्रियों में गुपचुप तरीके से नकली दवाइयां तैयार कर कई राज्यों में सप्लाई की जा रही थीं।
24 दवाएं स्टैंडर्ड क्वालिटी पर फेल
सीडीएससीओ की रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल महीने में देशभर से लिए गए दवाओं के सैंपल में 120 दवाएं नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी (NSQ) पाई गईं। इनमें 24 दवाएं उत्तराखंड में बनी थीं। ये दवाइयां सर्दी-जुकाम, बुखार, ब्लड प्रेशर, शुगर, एसिडिटी और मानसिक रोगों के इलाज में इस्तेमाल होती हैं।
फूड सेफ्टी एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के अनुसार 1 जनवरी 2026 से 23 मई 2026 तक प्रदेशभर में 866 निरीक्षण किए गए, जिनमें 419 दवाओं के सैंपल लिए गए। जांच में 43 दवाएं एनएसक्यू पाई गईं, जिसके बाद 40 फार्मा निर्माण इकाइयों के लाइसेंस सस्पेंड या निरस्त किए गए हैं।
एफडीए के संयुक्त औषधि नियंत्रक डॉ. सुधीर कुमार ने कहा कि प्रदेशभर में लगातार छापेमारी की जा रही है और बिना लाइसेंस दवा निर्माण या बिक्री करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।
फेसबुक पेज से चल रहा था नकली दवाओं का कारोबार
एसटीएफ जांच में सामने आया कि “SK Health Care” नामक फेसबुक पेज के जरिए ब्रांडेड कंपनियों की नकली दवाइयां आधे दाम में बेची जा रही थीं।
गिरोह सनफार्मा, मैनकाइंड, जायडस, ग्लेनमार्क और मैक्लोड्स जैसी कंपनियों की पैकेजिंग और होलोग्राम की हूबहू कॉपी कर नकली दवाइयां बिहार, यूपी, दिल्ली, पंजाब, चंडीगढ़ और उत्तराखंड तक सप्लाई कर रहा था।
एसटीएफ ने ग्राहक बनकर दवाइयां मंगाईं, जिसके बाद नेटवर्क का खुलासा हुआ। जांच में Gudcef Plus और Tydol 100 जैसी नकली दवाइयों की खेप देहरादून मंगवाई गई। मामले में गौरव त्यागी और जतिन सैनी को गिरफ्तार किया गया है।
पूछताछ में गौरव त्यागी ने कबूला कि बंद पड़ी फैक्ट्रियों को जरूरत पड़ने पर अस्थायी रूप से खोलकर नकली दवाइयां तैयार की जाती थीं और बाद में दोबारा बंद कर दिया जाता था, ताकि किसी को शक न हो।
कोटद्वार की फैक्ट्री सील
एसटीएफ, ड्रग विभाग और प्रशासन की संयुक्त टीम ने कोटद्वार के सिडकुल सिगड्डी क्षेत्र स्थित “मैसर्स नैक्टर हर्ब्स एंड ड्रग्स” फैक्ट्री पर छापा मारकर उसे सील कर दिया।
फैक्ट्री का लाइसेंस वर्ष 2024 में निरस्त किया जा चुका था, लेकिन परिसर के भीतर मशीनें, टैबलेट निर्माण उपकरण और संदिग्ध सामग्री बरामद हुई।
टीम ने मौके से लगभग 3 किलो कंप्रेस्ड टैबलेट और 34 पंच उपकरण जब्त किए हैं। यही फैक्ट्री पहले 2021 में नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन और 2024 में फर्जी पैकेजिंग सामग्री बरामद होने के मामलों में भी चर्चा में रह चुकी है।
STF की चेतावनी
एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने कहा कि नकली दवाइयां “साइलेंट किलर” की तरह काम करती हैं। मरीज को पता भी नहीं चलता कि वह असली की जगह नकली दवा का सेवन कर रहा है। इससे बीमारी बढ़ सकती है और इलाज पूरी तरह विफल हो सकता है।
मामले में साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन देहरादून में धोखाधड़ी, जालसाजी, आईटी एक्ट, कॉपीराइट एक्ट और संगठित अपराध से जुड़ी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क से जुड़े बड़े सप्लायरों, आर्थिक लेनदेन और ऑनलाइन चैनलों की पड़ताल में जुटी हैं।
आम जनता के लिए अपील
- बिना बिल दवाइयां न खरीदें।
- दवा का बैच नंबर और एक्सपायरी डेट जरूर जांचें।
- अधिक छूट के लालच में ऑनलाइन दवाइयां न खरीदें।
- केवल अधिकृत मेडिकल स्टोर से ही दवा लें।
- किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस या ड्रग विभाग को दें।
STF हेल्पलाइन
- 0135-2656202
- 9412029536

