‘एक कानून सब पर लागू करना संभव नहीं’, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने जताई आपत्ति
देहरादून में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर जारी बहस के बीच ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने अपना विरोध स्पष्ट रूप से दर्ज कराया है। बोर्ड ने कहा है कि वह इस कानून को स्वीकार नहीं करता और इसे देश की बहुलता तथा धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ मानता है।
प्रेस वार्ता में बोर्ड के प्रवक्ता डॉ. सैयद कासिम रसूल इलियास ने कहा कि भारत जैसे विविधतापूर्ण समाज में सभी समुदायों पर एक समान कानून लागू करना व्यावहारिक नहीं है। उनके मुताबिक, इससे सामाजिक असंतोष बढ़ सकता है और संविधान द्वारा प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।
मदरसों और धार्मिक संस्थानों पर उठाए सवाल
प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि मदरसों की शिक्षा प्रणाली और पाठ्यक्रमों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने राज्य में मदरसा व्यवस्था में सरकारी हस्तक्षेप पर भी चिंता जताई। बोर्ड का कहना है कि इस पूरे मामले को अदालत में चुनौती दी जा चुकी है और यह फिलहाल सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है।
धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई को बताया चिंताजनक
प्रेस वार्ता में मस्जिदों और मजारों को दस्तावेजों के आधार पर हटाने की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए गए। इसके अलावा, इस्लाम और पैगंबर पर आपत्तिजनक टिप्पणियों के मामलों में पुलिस की कथित निष्क्रियता को लेकर भी नाराजगी जाहिर की गई।
लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा विरोध
बोर्ड ने स्पष्ट किया कि वह इस मुद्दे पर लोकतांत्रिक और कानूनी तरीकों से अपना विरोध जारी रखेगा। प्रेस वार्ता में नईम कुरैशी समेत अन्य प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

