राजनीति: चुनाव से पहले सियासी संतुलन साधने की कोशिश, नेताओं को बांटे गए दायित्व

चुनाव से पहले सियासी संतुलन साधने की कोशिश, नेताओं को बांटे गए दायित्व

देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में आगामी चुनावों से पहले हलचल तेज हो गई है। प्रदेश सरकार ने लंबे समय से लंबित दायित्व वितरण प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए विभिन्न सलाहकार समितियों, परिषदों और आयोगों में कई वरिष्ठ नेताओं को अहम जिम्मेदारियां सौंपी हैं। इनमें कुछ नेताओं को दर्जाधारी राज्यमंत्री का दर्जा भी प्रदान किया गया है।

राजनीतिक दृष्टि से इस फैसले को बेहद अहम माना जा रहा है। इसे संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने और क्षेत्रीय व सामाजिक संतुलन साधने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

कुमाऊं और गढ़वाल दोनों मंडलों से नेताओं को प्रतिनिधित्व देकर यह संकेत दिया गया है कि चुनावी तैयारियां अब तेज रफ्तार पकड़ चुकी हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम लंबे समय से संगठन में सक्रिय कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं को सम्मान देने के साथ-साथ पार्टी के भीतर नई ऊर्जा भरने का प्रयास है। इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल भी बढ़ेगा।

इन नेताओं को मिली अहम जिम्मेदारियां

  • नैनीताल के वरिष्ठ पत्रकार ध्रुव रौतैला को मीडिया सलाहकार समिति का उपाध्यक्ष बनाया गया है।
  • टिहरी गढ़वाल के विनोद सुयाल को युवा कल्याण सलाहकार समिति का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
  • सोना सजवाण को जड़ी-बूटी सलाहकार समिति का उपाध्यक्ष बनाया गया है।
  • चंपावत के मुकेश महराना को चाय विकास सलाहकार समिति का उपाध्यक्ष बनाया गया है।
  • कुलदीप सिंह बुटोला को उत्तराखंड राज्य स्तरीय खेल परिषद का अध्यक्ष बनाया गया है।
  • खेम सिंह चौहान को उत्तराखंड ओबीसी आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
  • चारु कोठारी को राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद का उपाध्यक्ष बनाया गया है।
  • हरिप्रिया जोशी को उत्तराखंड राज्य महिला आयोग का उपाध्यक्ष बनाया गया है।
  • गोविंद पिलखवाल को राज्यमंत्री दर्जे के साथ हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषद का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
  • बलजीत सोनी को अल्पसंख्यक आयोग का उपाध्यक्ष बनाया गया है।
  • प्रेम सिंह राणा को जनजाति आयोग में उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है।

सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में कुछ और नामों की घोषणा भी हो सकती है। ऐसे में कई नेता अभी भी उम्मीद लगाए बैठे हैं। माना जा रहा है कि चुनावी समर से पहले यह दायित्व वितरण राजनीतिक समीकरण साधने में अहम भूमिका निभाएगा।