मैक्स हॉस्पिटल में एडवांस्ड रोबोटिक तकनीक से घुटनों का सफल ऑपरेशन, मरीज फिर से हुआ सक्रिय
देहरादून स्थित Max Super Speciality Hospital, Dehradun ने घुटनों के गंभीर बाइलेटरल ऑस्टियोआर्थराइटिस से पीड़ित 61 वर्षीय मरीज का सफल उपचार कर उन्हें दोबारा सक्रिय जीवन की ओर लौटाया है।
एडवांस्ड रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट और जॉइंट प्रिजर्वेशन सर्जरी के माध्यम से मरीज अब दर्द-मुक्त होकर सामान्य गतिविधियाँ कर पा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, मरीज श्री एस.सी. गर्ग पिछले कई महीनों से दोनों घुटनों में लगातार दर्द, सूजन और अकड़न से जूझ रहे थे। चलना, सीढ़ियां चढ़ना और रोजमर्रा के कार्य भी उनके लिए कठिन हो गए थे। समय के साथ उनकी गतिशीलता में कमी आने लगी और जीवन की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
अस्पताल में विस्तृत जांच के बाद पता चला कि बाएं घुटने के अगले हिस्से में आर्थराइटिस था, जबकि दाएं घुटने में गंभीर डीजेनेरेटिव आर्थराइटिस मौजूद था। मरीज की स्थिति का समग्र मूल्यांकन करने के बाद ऑर्थोपेडिक टीम ने एक विशेष सर्जिकल प्लान तैयार किया।
ऑर्थोपेडिक टीम का नेतृत्व डॉ. गौरव गुप्ता (डायरेक्टर – ऑर्थोपेडिक्स एवं जॉइंट रिप्लेसमेंट) और डॉ. शुभम अग्रवाल (कंसल्टेंट – ऑर्थोपेडिक्स) ने किया। टीम ने बाएं घुटने में रोबोटिक पेटेलोफेमोरल (पार्शियल नी) रिप्लेसमेंट तथा दाएं घुटने में रोबोटिक टोटल नी रिप्लेसमेंट सर्जरी सफलतापूर्वक की।
अस्पताल के अनुसार, यह नॉर्थ इंडिया की पहली और भारत की दूसरी रोबोटिक पेटेलोफेमोरल नी रिप्लेसमेंट सर्जरी रही।
डॉ. गौरव गुप्ता ने बताया कि घुटनों का आर्थराइटिस व्यक्ति की दैनिक गतिविधियों को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। उनका उद्देश्य केवल दर्द से राहत देना नहीं, बल्कि मरीज को आत्मविश्वास के साथ सक्रिय जीवन की ओर लौटाना है। उन्होंने कहा कि पर्सनलाइज्ड सर्जिकल प्लान और संरचित रिहैबिलिटेशन के माध्यम से अधिकांश मरीज बेहतर परिणाम प्राप्त कर सकते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि रोबोटिक तकनीक के माध्यम से केवल प्रभावित हिस्से को अत्यंत सटीकता से बदला जाता है, जिससे स्वस्थ जॉइंट संरक्षित रहता है और दीर्घकालिक लाभ मिलते हैं।
डॉ. गुप्ता ने समय पर परामर्श लेने की सलाह देते हुए कहा कि यदि घुटनों का दर्द दवाइयों, फिजियोथेरेपी या जीवनशैली में बदलाव के बावजूद ठीक नहीं हो रहा है, तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
सर्जरी कंबाइंड स्पाइनल-एपिड्यूरल एनेस्थीसिया के तहत की गई। ऑपरेशन के बाद मरीज को वॉकर की सहायता से चलाया गया और संरचित फिजियोथेरेपी प्रोग्राम के तहत पुनर्वास कराया गया।
स्थिर स्थिति में मरीज को नियमित फॉलो-अप की सलाह के साथ अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि उन्नत तकनीक, समय पर डायग्नोसिस और मरीज-केंद्रित उपचार के जरिए वह क्षेत्र में ऑर्थोपेडिक देखभाल को नई दिशा दे रहा है।



