बड़ी खबर: सरकारी दस्तावेजों के दुरुपयोग पर वन क्षेत्राधिकारी निलंबित, विभागीय जांच जारी

सरकारी दस्तावेजों के दुरुपयोग पर वन क्षेत्राधिकारी निलंबित, विभागीय जांच जारी

देहरादून। उत्तराखंड वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए वन क्षेत्राधिकारी (Range Officer) कुलदीप सिंह पंवार को निलंबित कर दिया है।

उन पर सरकारी अभिलेखों को अनधिकृत रूप से प्राप्त करने, उनके दुरुपयोग और सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act) के नियमों की अनदेखी करने के गंभीर आरोप हैं। प्रारंभिक जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई है।

वन विभाग के अनुसार कुलदीप सिंह पंवार ने ऐसे संवेदनशील विभागीय दस्तावेज अपने पास रखे और उनका उपयोग किया, जिन्हें न तो किसी सक्षम अधिकारी द्वारा प्रमाणित किया गया था और न ही उन्हें सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत वैधानिक प्रक्रिया से प्राप्त किया गया था। इस मामले की जांच काफी समय से चल रही थी, जिसके बाद निलंबन का आदेश जारी किया गया।

कैसे सामने आया मामला

इस पूरे प्रकरण की शुरुआत तब हुई, जब वन संरक्षक, अनुसंधान वृत्त उत्तराखंड, हल्द्वानी को एक पत्र प्राप्त हुआ। पत्र में आरोप लगाया गया था कि वन क्षेत्राधिकारी कुलदीप सिंह पंवार के पास ऐसे विभागीय दस्तावेज मौजूद हैं, जो उन्हें कभी आधिकारिक रूप से उपलब्ध नहीं कराए गए।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि संबंधित दस्तावेज न तो वैधानिक प्रक्रिया से प्राप्त किए गए थे और न ही किसी अधिकृत अधिकारी द्वारा प्रमाणित थे। विभागीय स्तर पर जब दस्तावेजों की वैधता की जांच की गई, तो मामला गंभीर पाया गया।

निजी सूचनाओं के दुरुपयोग का भी आरोप

जांच में यह भी सामने आया कि जिन अभिलेखों का इस्तेमाल किया गया, उनमें कुछ दस्तावेज एक निजी व्यक्ति से जुड़ी व्यक्तिगत सूचनाओं से संबंधित थे।

विभाग का कहना है कि बिना वैधानिक अनुमति इस प्रकार की निजी जानकारी प्राप्त करना और उसका उपयोग करना संविधान में प्रदत्त निजता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।

नियमों और कानूनों का उल्लंघन

जांच रिपोर्ट के अनुसार यह कृत्य उत्तराखंड राज्य कर्मचारी आचरण नियमावली, 2002 के नियम 3(1), 3(2) और 9 का स्पष्ट उल्लंघन है। इसके साथ ही यह मामला भारतीय दंड संहिता (BNS) की धाराओं 303, 61 और 356 सहित अन्य सुसंगत धाराओं के अंतर्गत भी गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सरकारी दस्तावेजों की गोपनीयता भंग होने से विभाग की कार्यप्रणाली और विश्वसनीयता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

स्पष्टीकरण में असफल रहे अधिकारी

वन विभाग द्वारा कुलदीप सिंह पंवार से इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा गया था। विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार 11 नवंबर 2025 को उनसे जवाब तलब किया गया, लेकिन तय समय सीमा के भीतर कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला।

बाद में भी उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया, लेकिन वे न तो दस्तावेजों के स्रोत की स्पष्ट जानकारी दे पाए और न ही यह साबित कर सके कि अभिलेख वैधानिक रूप से प्राप्त किए गए थे।

मुख्य वन संरक्षक ने जारी किया निलंबन आदेश

मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तराखंड के प्रमुख वन संरक्षक (HoFF), देहरादून ने निलंबन आदेश जारी किया। आदेश में कहा गया है कि प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट है कि वन क्षेत्राधिकारी द्वारा सरकारी अभिलेखों का अनधिकृत उपयोग किया गया, जो विभागीय अनुशासन के विरुद्ध है।

निलंबन अवधि के दौरान कुलदीप सिंह पंवार को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा और वे वन संरक्षक, शिवालिक वृत्त उत्तराखंड कार्यालय से संबद्ध रहेंगे।

विस्तृत विभागीय जांच जारी

वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई प्रारंभिक जांच के आधार पर की गई है और पूरे मामले की विस्तृत विभागीय जांच अभी जारी है। यदि जांच में आरोप पूरी तरह प्रमाणित होते हैं, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ और भी कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

साथ ही विभाग ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सरकारी दस्तावेजों की सुरक्षा और सूचना के अधिकार से जुड़े नियमों को और अधिक सख्ती से लागू किया जाएगा।