विशेष रिपोर्ट: IMA POP 2025 बना यादगार। पहली महिला अधिकारी, 491 नए अफसर और देशसेवा का संकल्प

IMA POP 2025 बना यादगार। पहली महिला अधिकारी, 491 नए अफसर और देशसेवा का संकल्प

देहरादून। भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) देहरादून में आयोजित पासिंग आउट परेड–2025 कई मायनों में ऐतिहासिक और प्रेरणादायक रही।

इस गौरवशाली समारोह में जहां 491 ऑफिसर कैडेट्स ने प्रशिक्षण पूर्ण कर भारतीय सेना में बतौर अधिकारी कदम रखा, वहीं परंपरा, संघर्ष और बदलाव की मिसालें भी एक साथ देखने को मिलीं।

इस परेड की सबसे प्रेरक कहानियों में पंजाब के गुरदासपुर निवासी लेफ्टिनेंट हरप्रीत सिंह की कहानी रही, जिन्होंने भारतीय सेना में क्लर्क पद से सेवा शुरू कर कठिन परिश्रम और लगन के बल पर अधिकारी बनने का सपना साकार किया।

पासिंग आउट परेड के दौरान उनके परिवार के दो ‘नन्हे सैनिक’ हिम्मत सिंह और अजीत सिंह सेना की वर्दी पहनकर कार्यक्रम में शामिल हुए और सभी के आकर्षण का केंद्र बने।

खास बात यह रही कि थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी स्वयं बच्चों के पास पहुंचे और उनके साथ फोटो खिंचवाकर इस पल को और भी यादगार बना दिया।

हरप्रीत सिंह का परिवार पहले से ही सेना की गौरवशाली परंपरा से जुड़ा है। उनके बड़े भाई मेजर लवप्रीत सिंह पहले से सेना में सेवारत हैं। पिता तरसेम सिंह ने इसे परिवार के लिए गर्व का क्षण बताते हुए कहा कि वे चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ी भी देशसेवा की इस परंपरा को आगे बढ़ाए।

वहीं, इस पासिंग आउट परेड में IMA के 93 वर्षों के इतिहास में पहली बार किसी महिला अधिकारी का पास आउट होना भी ऐतिहासिक क्षण रहा। महाराष्ट्र की सई जाधव भारतीय सैन्य अकादमी से पास आउट होने वाली पहली महिला अधिकारी बनीं।

वह टेरिटोरियल आर्मी में बतौर लेफ्टिनेंट अपनी सेवाएं देंगी। सई जाधव सेना से जुड़ी चौथी पीढ़ी हैं, उनके परदादा, दादा और पिता तीनों सेना में सेवाएं दे चुके हैं। पीपिंग सेरेमनी के दौरान उनके माता-पिता ने कंधों पर सितारे लगाकर इस ऐतिहासिक पल को भावुक बना दिया।

पासिंग आउट परेड में थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने रिव्यूइंग ऑफिसर के रूप में ड्रिल स्क्वायर पर परेड का निरीक्षण किया।

उन्होंने युवा अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि सेना में कमीशन मिलना केवल प्रशिक्षण की समाप्ति नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति आजीवन कर्तव्य की शुरुआत है।

समारोह के दौरान उनका युवा अधिकारियों के साथ पुशअप करना भी चर्चा का विषय बना, जिसने सभी का उत्साह बढ़ाया।

इस अवसर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कैडेट्स को पदकों से सम्मानित किया गया। स्वॉर्ड ऑफ ऑनर और स्वर्ण पदक निष्कल द्विवेदी, रजत पदक बादल यादव और कांस्य पदक कमलजीत सिंह को प्रदान किया गया। विदेशी कैडेट्स में बांग्लादेश के मोहम्मद सफीन अशरफ ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।

IMA की यह पासिंग आउट परेड केवल एक सैन्य आयोजन नहीं रही, बल्कि यह संघर्ष, परंपरा, पीढ़ियों की देशसेवा और बदलते भारत की सैन्य तस्वीर का जीवंत प्रतीक बनकर सामने आई।