बिग ब्रेकिंग: 300 कर्मचारियों वाला फर्जी कॉल सेंटर उजागर, विदेशी डेटा से खेला जा रहा था ठगी का खेल

300 कर्मचारियों वाला फर्जी कॉल सेंटर उजागर, विदेशी डेटा से खेला जा रहा था ठगी का खेल

देहरादुन। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अमेरिकी नागरिकों को माइक्रोसॉफ्ट का अधिकारी बनकर ठगने वाले देहरादून स्थित फर्जी कॉल सेंटर पर बड़ी कार्रवाई की है।

ईडी ने ए टू ज़ेड सॉल्यूशंस के मालिक अरिफ अली समेत नितिन गुप्ता, गर्वित सिंघल और उदित गर्ग के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत विशेष न्यायालय में अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) दाखिल की है। अदालत ने सभी आरोपितों को नोटिस जारी कर दिए हैं।

जुलाई 2022 में हुआ था भंडाफोड़

यह मामला जुलाई 2022 में तब सामने आया था जब उत्तराखंड एसटीएफ ने न्यू रोड स्थित कॉल सेंटर पर छापा मारकर 14 आरोपितों को गिरफ्तार किया था। मौके से भारी मात्रा में नकदी, लैपटॉप और डाटा बरामद किया गया था। इसके बाद ईडी ने मेघा रावत और अन्य के खिलाफ दर्ज एसटीएफ की एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की।

ठगी का तरीका

गिरोह के सदस्य खुद को माइक्रोसॉफ्ट अधिकारी बताकर विदेशी नागरिकों से संपर्क करते थे। उनके कंप्यूटर पर हैकिंग एप के जरिए एक्सेस हासिल कर लेते थे और तकनीकी खामियां दूर करने या एंटीवायरस अपडेट करने का झांसा देकर 500 से 1000 डॉलर वसूलते थे। इतना ही नहीं, पीड़ितों के सिस्टम पर पोर्न साइट्स की सर्च हिस्ट्री डालकर उन्हें ब्लैकमेल भी किया जाता था।

दिल्ली से मिलता था डाटा

इस संगठित नेटवर्क को विदेशी नागरिकों का डाटा दिल्ली की एक एजेंसी से मिलता था। यही एजेंसी फर्जी टोल-फ्री नंबर जारी करती थी, जो पॉप-अप संदेशों के जरिए विदेशों में माइक्रोसॉफ्ट हेल्पलाइन के नाम पर पहुंचते थे। कॉल करने पर उन्हें सीधे देहरादून स्थित इस कॉल सेंटर से जोड़ दिया जाता था।

करोड़ों की कमाई और 300 कर्मचारी

फर्जी कॉल सेंटर में करीब 300 लोग कार्यरत थे, जिन्हें 20 से 25 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाता था। अवैध रूप से कमाए गए करोड़ों रुपये गैरकानूनी चैनलों से भारत लाए जाते थे। ईडी ने उत्तराखंड पुलिस की छापेमारी में बरामद 1.26 करोड़ रुपये नकद भी कुर्क कर लिया है।

ईडी की सख्ती

ईडी अधिकारियों का कहना है कि इस ठगी नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने के लिए जांच तेज कर दी गई है। यह पता लगाया जा रहा है कि और कौन लोग इस नेटवर्क से जुड़े हैं और विदेश से भारत में पैसा किन चैनलों से भेजा जाता था।