विशेष रिपोर्ट: उत्तराखंड में हंगामे का हाई वोल्टेज ड्रामा बैठकें बनीं रणभूमि, एजेंडा गायब

उत्तराखंड में हंगामे का हाई वोल्टेज ड्रामा बैठकें बनीं रणभूमि, एजेंडा गायब

देहरादून। उत्तराखंड में स्थानीय निकायों से लेकर जिला योजना बैठकों तक सियासी टकराव खुलकर सामने आ रहा है। देहरादून नगर निगम की चौथी बोर्ड बैठक और हरिद्वार की जिला योजना समिति की बैठक दोनों ही जगह जमकर हंगामा हुआ, जिससे विकास कार्यों पर चर्चा प्रभावित रही।

देहरादून नगर निगम की चौथी बोर्ड बैठक में 65 प्रस्तावों पर चर्चा होनी थी, लेकिन बैठक शुरू होते ही कांग्रेस पार्षदों ने हंगामा शुरू कर दिया।

उनका आरोप था कि उनकी रैली के पोस्टर-बैनर नगर निगम कर्मचारियों द्वारा हटाए गए। इस मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस पार्षद आमने-सामने आ गए, जिससे बैठक का माहौल गरमा गया।

बैठक में पार्षदों ने सफाई व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। आरोप लगाया गया कि कुछ वार्डों में सफाई कर्मचारियों की संख्या अधिक है, जबकि कई वार्डों में कमी है।

इस पर मेयर और नगर आयुक्त ने एक महीने में सभी 100 वार्डों में समान व्यवस्था लागू करने का आश्वासन दिया। वहीं, पार्षद अमिता सिंह ने सफाई कर्मचारियों के मानदेय बढ़ाने की मांग भी उठाई।

इसके अलावा शहर में संचालित बार और हुक्का बार का मुद्दा भी बैठक में गरमाया। पार्षदों ने बाहरी राज्यों से आने वाले युवाओं द्वारा हुड़दंग की शिकायत उठाई और शहर की व्यवस्था सुधारने की जरूरत पर जोर दिया। करीब एक साल बाद आयोजित इस बैठक में पार्षदों ने विकास कार्यों की धीमी गति पर भी नाराजगी जताई।

वहीं, हरिद्वार में जिला योजना समिति की बैठक में भी जबरदस्त हंगामा देखने को मिला। बैठक की अध्यक्षता कर रहे Satpal Maharaj के सामने ही कांग्रेस और बसपा विधायकों ने एजेंडे में अपने प्रस्ताव शामिल न किए जाने का आरोप लगाते हुए विरोध शुरू कर दिया।

हंगामे के दौरान सभी छह विधायक अपनी सीटों पर खड़े होकर विरोध जताते रहे और बाद में एजेंडे की फाइल फेंककर बैठक का बहिष्कार कर दिया।

इसके बाद कांग्रेस विधायक Anupama Rawat, Mamata Rakesh समेत अन्य विधायकों और बसपा विधायक Mohammad Shahzad ने बैठक हॉल के बाहर धरना देकर नारेबाजी की।

विधायकों का आरोप था कि उनके क्षेत्रों से जुड़े विकास प्रस्तावों को एजेंडे में शामिल नहीं किया गया, जबकि ठेकेदारों और अधिकारियों के प्रस्तावों को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी समस्याओं की अनदेखी का भी आरोप लगाया।

वहीं, मंत्री सतपाल महाराज ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बैठक में सभी विभागों के प्रस्ताव शामिल किए गए थे और विपक्ष केवल विरोध के लिए हंगामा कर रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि विधायकों को बार-बार बैठक में बैठने का आग्रह किया गया, लेकिन वे सुनने को तैयार नहीं थे।

दोनों घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में विकास योजनाओं और स्थानीय मुद्दों को लेकर राजनीतिक खींचतान तेज हो गई है, जिसका सीधा असर प्रशासनिक कामकाज और जनहित से जुड़े फैसलों पर पड़ रहा है।