सियासत भी, विकास भी! उत्तराखंड में एक साथ कई बड़े राजनीतिक अपडेट, पढ़ें….
देहरादून। उत्तराखंड में इन दिनों विकास परियोजनाओं, राजनीतिक गतिविधियों और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने को लेकर हलचल तेज हो गई है।
प्रधानमंत्री के संभावित दौरे से लेकर एक्सप्रेसवे उद्घाटन, शिक्षा संस्थानों की स्थापना और संचार सेवाओं के विस्तार तक कई बड़े मुद्दे एक साथ सुर्खियों में हैं।
PM मोदी के दौरे को लेकर बढ़ी हलचल
Narendra Modi के 14 अप्रैल को प्रस्तावित उत्तराखंड दौरे को लेकर भाजपा संगठन पूरी तरह एक्टिव मोड में आ गया है।
पार्टी कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां दी जा रही हैं और जनसभा को सफल बनाने की तैयारियां जोरों पर हैं। इस दौरान उनके डाट काली मंदिर में पूजा और एक बड़ी जनसभा को संबोधित करने की संभावना जताई जा रही है।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन संभव
इस दौरे के दौरान बहुप्रतीक्षित दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन भी संभावित है। करीब 213 किमी लंबे इस ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट से दिल्ली और देहरादून के बीच सफर घटकर करीब 2.5 से 3 घंटे रह जाएगा। यह परियोजना राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है।
एक्सप्रेसवे के नाम को लेकर सियासत तेज
नगीना सांसद Chandrashekhar Azad ने केंद्रीय मंत्री Nitin Gadkari को पत्र लिखकर एक्सप्रेसवे का नाम B. R. Ambedkar के नाम पर रखने की मांग की है। इस प्रस्ताव के बाद नामकरण को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
टिहरी में नए केंद्रीय विद्यालय को मंजूरी
टिहरी गढ़वाल के मदननेगी में नए केंद्रीय विद्यालय की स्थापना को मंजूरी मिल गई है। Pushkar Singh Dhami ने इसे क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि बताया है। यह विद्यालय 2026-27 सत्र से शुरू होगा, जिसमें शुरुआती चरण में कक्षा 1 से 5 तक पढ़ाई होगी।
नैनीताल में कनेक्टिविटी सुधार पर जोर
नैनीताल जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क और संचार सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रशासन ने कदम तेज कर दिए हैं।
जिला टेलीकॉम कमेटी की बैठक में डार्क एरिया में नेटवर्क सुधार, 4G टावर स्थापना और भारत नेट परियोजना की समीक्षा की गई। अब तक 288 गांवों को कनेक्टिविटी से जोड़ा जा चुका है, जबकि बाकी क्षेत्रों में काम जारी है।
उत्तराखंड में एक ओर जहां प्रधानमंत्री के संभावित दौरे को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म है, वहीं दूसरी ओर विकास परियोजनाओं, शिक्षा और डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत करने के प्रयास भी तेज हो गए हैं।
यह संकेत है कि आने वाले समय में राज्य में बुनियादी ढांचे और सुविधाओं में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।



