बिग ब्रेकिंग: मदरसा शिक्षा में बड़ा बदलाव, नई गाइडलाइन जारी। 11 शर्तों पर मिलेगी मान्यता

मदरसा शिक्षा में बड़ा बदलाव, नई गाइडलाइन जारी। 11 शर्तों पर मिलेगी मान्यता

देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने मदरसा शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव का फैसला लिया है। 1 जुलाई से उत्तराखंड मदरसा बोर्ड को भंग कर दिया जाएगा, जिसके बाद राज्य के सभी मदरसों को नई नियमावली के तहत संचालित होना अनिवार्य होगा।

सरकार का उद्देश्य मदरसा शिक्षा को मुख्यधारा से जोड़ना और छात्रों को समान शैक्षणिक अवसर प्रदान करना है।

11 शर्तों पर ही मिलेगी मान्यता

नई व्यवस्था के तहत उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग (प्राधिकरण) की धारा 14 के अंतर्गत मदरसों को मान्यता के लिए 11 अनिवार्य शर्तें पूरी करनी होंगी।

  • किसी छात्र/शिक्षक को धार्मिक गतिविधियों के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा
  • केवल मान्यता प्राप्त डिग्रीधारी शिक्षक ही नियुक्त होंगे।
  • संस्थान का संचालन अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा
    राज्य शिक्षा परिषद से संबद्धता अनिवार्य।
  • सोसायटी रजिस्ट्रार में पंजीकरण जरूरी
  • भूमि संस्थान/सोसायटी के नाम पर हो
  • सभी लेनदेन बैंक खाते से
  • सोसायटी के सदस्य अल्पसंख्यक समुदाय से हों
  • प्राधिकरण के निर्देशों का पालन
  • सामाजिक एवं सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखना
  • 3 साल की ऑडिट रिपोर्ट, खेल मैदान और प्रशिक्षित शिक्षक अनिवार्य

अब बदलेगा पढ़ाई का ढांचा

मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष मुफ्ती शमून काश्मी के अनुसार

  • रोजाना 6–7 पीरियड सामान्य विषयों (Maths, Science, etc.) के
  • धार्मिक शिक्षा अलग समय (स्कूल के बाद) “पार्ट-2” में दी जाएगी

यानी अब मदरसों में पढ़ाई पूरी तरह राज्य शिक्षा बोर्ड के सिलेबस के अनुसार होगी।

राज्य में मदरसों की वर्तमान स्थिति

  • कुल मान्यता प्राप्त मदरसे: 482
  • कुल छात्र: 50,000+
  • देहरादून में मदरसे: 36

अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी जेएस रावत ने स्पष्ट किया है कि नई शर्तों को पूरा किए बिना किसी भी मदरसे को मान्यता नहीं दी जाएगी।

छात्रों को मिलेगा बड़ा फायदा

नई व्यवस्था के तहत

  • पहले: ‘मुंशी’ या ‘मौलवी’ प्रमाणपत्र (सीमित मान्यता)
  • अब: हाईस्कूल और इंटर के बराबर प्रमाणपत्र

इससे छात्रों को अन्य स्कूलों, कॉलेजों और प्रतियोगी परीक्षाओं में आसानी होगी।

छोटे-बड़े मदरसों के लिए अलग नियम

सरकार ने संकेत दिए हैं कि,

  • छोटे मदरसे (मकतब): प्राथमिक/कोचिंग सेंटर की तरह
  • जूनियर/सीनियर मदरसे: स्तर के अनुसार अलग नियम

शुरुआती चरण में संस्थानों को नई व्यवस्था में ढलने के लिए समय और अस्थायी मान्यता भी दी जा सकती है।

शिक्षा सुधार की दिशा में बड़ा कदम

यह बदलाव उत्तराखंड की शिक्षा प्रणाली में एक बड़े सुधार के रूप में देखा जा रहा है। इससे पारदर्शिता, गुणवत्ता और समान अवसर सुनिश्चित होंगे, वहीं हजारों छात्रों को मुख्यधारा की शिक्षा से जुड़ने का मौका मिलेगा।