CrPC धारा 125, अंतरिम भरण-पोषण सामान्यत, आवेदन की तारीख से ही मिलेगा – दिल्ली हाईकोर्ट
नई दिल्ली : दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि CrPC की धारा 125 के तहत अंतरिम भरण-पोषण (Interim Maintenance) आमतौर पर याचिका दायर करने की तारीख से ही दिया जाना चाहिए,
न कि किसी बाद की तारीख से। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि इससे अलग निर्णय लिया जाता है तो उसके लिए ठोस कारण दर्ज करना जरूरी होगा।
मामले की सुनवाई करते हुए Justice Swarana Kanta Sharma ने कहा कि जब कोई पत्नी और नाबालिग बच्चे यह आरोप लगाते हुए कोर्ट में आते हैं कि पति या पिता ने उनका भरण-पोषण करने से इनकार किया है,
और अदालत अंततः उन्हें भरण-पोषण का हकदार पाती है, तो सामान्य नियम यही है कि भरण-पोषण आवेदन की तारीख से लागू होगा।
कोर्ट ने यह भी कहा कि न्यायिक कार्यवाही में होने वाली देरी अक्सर व्यवस्थागत होती है और इसका दोष पत्नी या बच्चों पर नहीं डाला जा सकता। ऐसे में इस अवधि के लिए उन्हें भरण-पोषण से वंचित करना कानून के उद्देश्य को विफल कर देगा।
फैमिली कोर्ट के आदेश में संशोधन
दरअसल, फैमिली कोर्ट ने पत्नी और उसकी दो बेटियों को ₹5,500-₹5,500 प्रति माह (कुल ₹16,500) अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश दिया था, लेकिन इसकी शुरुआत 1 जनवरी 2019 से तय की थी, जबकि याचिका मार्च 2016 में ही दाखिल की गई थी।
याचिकाकर्ताओं ने इस फैसले को चुनौती देते हुए कहा कि मामले में हुई देरी के लिए वे जिम्मेदार नहीं हैं और पति, पर्याप्त साधन होने के बावजूद, लंबित अवधि में उनका भरण-पोषण नहीं कर रहा था।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला
हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में Rajnesh v. Neha (2021) और Shahjahan v. State of Uttar Pradesh (2025) का हवाला देते हुए कहा कि न्यायिक देरी से उत्पन्न आर्थिक कठिनाइयों को रोकने के लिए भरण-पोषण आमतौर पर आवेदन की तारीख से ही दिया जाना चाहिए।
अंतिम निर्देश
कोर्ट ने पाया कि फैमिली कोर्ट ने भरण-पोषण शुरू करने में लगभग तीन साल की देरी का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया। इसलिए आदेश में संशोधन करते हुए निर्देश दिया कि अंतरिम भरण-पोषण 5 मार्च 2016 से देय होगा, यानी उसी तारीख से जब याचिका पहली बार दाखिल की गई थी।



