बिग ब्रेकिंग: फैसले से प्रभावित गैर-पक्षकार भी कर सकते हैं रिव्यू की मांग: सुप्रीम कोर्ट

फैसले से प्रभावित गैर-पक्षकार भी कर सकते हैं रिव्यू की मांग: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी मामले में भले ही कोई व्यक्ति पक्षकार न रहा हो, लेकिन अगर अदालत के फैसले से उसके अधिकार प्रभावित होते हैं तो उसके पास कानूनी उपाय मौजूद हैं।

वह संबंधित फोरम के सामने फैसले की समीक्षा (रिव्यू) की मांग कर सकता है या उसे चुनौती दे सकता है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ ने केरल टेक्निकल एजुकेशन सर्विस में प्रमोशन से जुड़े विवाद की सुनवाई के दौरान यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की।

पीठ ने कहा कि सेवा संबंधी मामलों में कई बार अदालत के फैसलों का प्रभाव उन कर्मचारियों पर भी पड़ता है जो मुकदमे में पक्षकार नहीं होते। ऐसे मामलों में प्रभावित कर्मचारी उचित मंच के समक्ष जाकर फैसले के खिलाफ रिव्यू या चुनौती दे सकते हैं।

अदालत ने अपने फैसले में के. अजीत बाबू बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (1997) मामले का हवाला देते हुए कहा कि सामान्यतः रिव्यू का अधिकार केवल पक्षकारों को मिलता है, लेकिन विशेष परिस्थितियों में प्रभावित व्यक्ति भी इसकी मांग कर सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने रामा राव बनाम एम.जी. महेश्वर राव (2007) और यूनियन ऑफ इंडिया बनाम नरेशकुमार बद्रीकुमार जगद (2019) के फैसलों का भी उल्लेख किया।

अदालत ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को बिना सुने हुए फैसले से नुकसान पहुंचता है तो वह प्रशासनिक ट्रिब्यूनल या अन्य उचित मंच पर जाकर अपनी शिकायत रख सकता है, बशर्ते वह खुद को “पीड़ित व्यक्ति” साबित कर सके।