देहरादून रजिस्ट्री घोटाले में ED की चार्जशीट से बढ़ी सियासी और प्रशासनिक हलचल
रिपोर्ट- राजकुमार धीमान
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में सामने आए बहुचर्चित रजिस्ट्री फर्जीवाड़ा और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने विशेष पीएमएलए अदालत में तीन आरोपियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) दाखिल कर दी है।
चार्जशीट में हुमायूं परवेज, मो. वकील और मुकेश कुमार गुप्ता को आरोपी बनाया गया है। इन पर मनी लॉन्ड्रिंग अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
ईडी के अनुसार, यह मामला केवल जमीन की फर्जी
रजिस्ट्री तक सीमित नहीं था, बल्कि यह एक संगठित आपराधिक नेटवर्क था जिसने सरकारी रजिस्ट्री और राजस्व अभिलेखों में छेड़छाड़ कर जमीनों का स्वामित्व बदला, उन्हें अवैध रूप से बेचा और करोड़ों रुपये की काली कमाई को वैध संपत्ति में बदलने की कोशिश की।
1958 के रिकॉर्ड से छेड़छाड़ कर रची गई साजिश
जांच में खुलासा हुआ कि देहरादून के मौजा मजरा, परगना केंद्रीय दून क्षेत्र में स्थित करीब 2,550 वर्ग गज की कीमती जमीन से जुड़े 1958 के मूल रिकॉर्ड में हेरफेर किया गया। सरकारी रजिस्टरों में बदलाव कर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और 2019–2020 के बीच इन जमीनों की फर्जी रजिस्ट्रियां कर भोले-भाले खरीदारों को बेच दिया गया।
ईडी के मुताबिक, रिकॉर्ड रूम तक पहुंच बनाकर पुराने रजिस्टरों के पन्नों में बदलाव किया गया, जिससे वास्तविक स्वामित्व को बदलकर नए नाम दर्ज कर दिए गए।
मृत रिश्तेदारों के नाम पर खेल
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने पहले जमीन को अपने दिवंगत रिश्तेदारों के नाम ट्रांसफर दिखाया। उदाहरण के तौर पर हुमायूं परवेज के मृत पिता जलीलुर रहमान के नाम पर संपत्ति दर्ज कराई गई।
इसके बाद खुद को उनका वैध उत्तराधिकारी बताकर जमीन पर कानूनी दावा किया गया और फर्जी वसीयत व दस्तावेजों के सहारे संपत्तियों की बिक्री कर दी गई।
यह पूरा खेल कागजी दस्तावेजों और उत्तराधिकार के कानूनी प्रावधानों का दुरुपयोग कर रचा गया।
करोड़ों की अवैध कमाई
- हुमायूं परवेज: 11 फर्जी रजिस्ट्रियों से करीब 3.66 करोड़ रुपये की कमाई।
- मो. वकील: अवैध जमीन बिक्री से करीब 40 लाख रुपये अर्जित।
ईडी का दावा है कि आरोपियों की मिलीभगत कुछ रजिस्ट्रार कार्यालय के कर्मचारियों से भी थी। देहरादून और सहारनपुर के रजिस्ट्रार कार्यालयों में रिकॉर्ड से छेड़छाड़ के सबूत मिले हैं।
छापेमारी में नकदी, जेवरात और बैंक खाते फ्रीज
अगस्त 2024 में ईडी की कार्रवाई के दौरान:
- 24.50 लाख रुपये नकद जब्त
- 11.50 लाख रुपये बैंक खातों में फ्रीज
- लगभग 58.80 लाख रुपये मूल्य के हीरे, सोना और चांदी के आभूषण बरामद
ईडी के अनुसार अवैध कमाई को वैध संपत्ति के रूप में दिखाना स्पष्ट रूप से मनी लॉन्ड्रिंग की श्रेणी में आता है।
जुलाई 2023 में तत्कालीन डीएम सोनिका ने पकड़ा था फर्जीवाड़ा
यह मामला जुलाई 2023 में सामने आया था, जब तत्कालीन जिलाधिकारी Sonika ने प्रारंभिक जांच में गड़बड़ी पकड़ी। खुलासा हुआ कि कुछ अधिवक्ताओं, प्रॉपर्टी डीलरों और भूमाफियाओं ने मिलकर सब-रजिस्ट्रार कार्यालय और कलेक्ट्रेट के रिकॉर्ड रूम में हेरफेर की।
मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami के सख्त रुख के बाद दो अलग-अलग एसआईटी गठित की गईं।
- पुलिस ने 13 मुकदमे दर्ज कर 20 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
- एक आरोपी केपी सिंह की सहारनपुर जेल में मौत हो चुकी है।
- स्टांप विभाग की एसआईटी की संस्तुति पर करीब 100 एफआईआर दर्ज की गईं।
पुलिस पहले ही 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। यह अब तक का सबसे बड़ा रजिस्ट्री और भूमि फर्जीवाड़ा माना जा रहा है।
जांच जारी, और बड़े नामों पर नजर
ईडी ने अदालत से आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। एजेंसी का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले समय में इस नेटवर्क से जुड़े अन्य बड़े नामों पर भी कार्रवाई संभव है।
यह मामला सिर्फ जमीन घोटाले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकारी रिकॉर्ड सिस्टम की सुरक्षा, पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है।



