मसूरी ने खोया अपना ‘वैश्विक ब्रांड एंबेसडर’ पद्मश्री ट्रैवल राइटर ह्यूग गैंट्जर का निधन
मसूरी। उत्तराखंड के पर्यटन, साहित्य और पर्यावरण संरक्षण की पहचान बन चुके मशहूर ट्रैवल राइटर एवं पद्मश्री सम्मानित ह्यूग गैंट्जर का 94 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
उन्होंने मसूरी स्थित किंक्रेग लाइब्रेरी रोड के अपने निवास ओक ब्रुक में अंतिम सांस ली। उनके निधन से न सिर्फ मसूरी, बल्कि देश-विदेश के ट्रैवल जर्नलिज्म जगत में शोक की लहर है।
भारतीय नौसेना में कमांडर के रूप में सेवा देने के बाद ह्यूग गैंट्जर ने मसूरी को अपना स्थायी घर बनाया। यहीं से उन्होंने अपनी धर्मपत्नी कोलीन गैंट्जर के साथ मिलकर भारत की संस्कृति, विरासत और अनछुए पर्यटन स्थलों को दुनिया के नक्शे पर खास पहचान दिलाई।
लेखन और दृश्य माध्यम में अमिट विरासत
ह्यूग और कोलीन गैंट्जर की जोड़ी ने
- 30 से अधिक पुस्तकें,
- हजारों लेख,
- और दूरदर्शन पर प्रसारित 52 डॉक्यूमेंट्री
के ज़रिये भारत को “पर्यटन स्थल” नहीं, बल्कि “अनुभव” के रूप में पेश किया। इसी अतुलनीय योगदान के लिए वर्ष 2025 में गणतंत्र दिवस पर दोनों को ट्रैवल जर्नलिज्म के क्षेत्र में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।
मसूरी के संरक्षक भी थे ह्यूग गैंट्जर
वे केवल लेखक नहीं, बल्कि मसूरी के पर्यावरणीय संरक्षक भी थे। चूना खनन और अनियंत्रित निर्माण के खिलाफ उनकी आवाज़ ने ही मसूरी को बड़े विनाश से बचाया। उनके प्रयासों के चलते तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने मसूरी में खनन पर रोक लगाई। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में गठित मॉनिटरिंग कमेटी के सदस्य के रूप में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई।
रिश्तों में बसता था व्यक्तित्व
स्थानीय लोगों के लिए ह्यूग गैंट्जर परिवार के सदस्य जैसे थे। दिवाली-क्रिसमस पर उपहार, मिठाइयों से लगाव और हर सुख-दुख में सहभागिता—यही वजह थी कि मसूरी उन्हें सिर्फ लेखक नहीं, अपना अपना मानती थी। साहित्यकार गणेश शैली के शब्दों में,
“ह्यूग गैंट्जर के जाने से मसूरी सचमुच गरीब हो गई है।”
निजी जीवन और शिक्षा
- जन्म: 9 जनवरी 1931, पटना
- शिक्षा: मसूरी के हैम्पटन कोर्ट स्कूल, सेंट जॉर्ज कॉलेज, सेंट जोसेफ स्कूल नैनीताल, सेंट जेवियर्स कॉलेज कलकत्ता और केसी लॉ कॉलेज मुंबई
- पत्नी कोलीन गैंट्जर का निधन: 6 नवंबर 2024
- पिता जे.एफ. गैंट्जर: 1941-43 में मसूरी नगर पालिका के प्रशासक एवं चेयरमैन
- ह्यूग गैंट्जर का अंतिम संस्कार बुधवार सुबह कैमल्स बैक कब्रिस्तान स्थित पारिवारिक प्लॉट में किया जाएगा।
मसूरी ने आज सिर्फ एक लेखक नहीं, बल्कि अपनी आत्मा का एक हिस्सा खो दिया है।


