क्राइम रिपोर्ट: पौड़ी में गुलदार का आतंक, देहरादून में जमीन घोटाला, रामनगर में अवैध हूटर पर पुलिस सख्त

पौड़ी में गुलदार का आतंक, देहरादून में जमीन घोटाला, रामनगर में अवैध हूटर पर पुलिस सख्त

उत्तराखंड। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से सामने आई तीन घटनाओं ने एक बार फिर सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक सतर्कता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पौड़ी गढ़वाल में जहां गुलदार ने डेढ़ साल की मासूम की जान ले ली, वहीं देहरादून में जमीन के नाम पर लाखों की ठगी के मामले सामने आए हैं। दूसरी ओर रामनगर में पुलिस ने अवैध हूटर और वीआईपी रौब दिखाने वालों पर सख्त कार्रवाई कर स्पष्ट संदेश दिया है।

पौड़ी जिले के जयहरीखाल विकासखंड के बरस्वार गांव में मानव-वन्यजीव संघर्ष की एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई। गांव में घात लगाए बैठे गुलदार ने घर के आंगन में खेल रही डेढ़ साल की बच्ची याशिका को उठाकर मौत के घाट उतार दिया।

बच्ची अपनी मां के साथ आंगन में आई थी, तभी गुलदार ने झपट्टा मारकर उसे मुंह में दबाया और झाड़ियों की ओर भाग गया। करीब एक घंटे की खोजबीन के बाद घर से लगभग 20 मीटर दूर बच्ची का शव बरामद हुआ।

घटना के बाद पूरे गांव में दहशत और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों ने गुलदार को आदमखोर घोषित कर पकड़ने या शूट करने की मांग की है। वन विभाग ने क्षेत्र में गश्त बढ़ाने की बात कही है।

वहीं राजधानी देहरादून के थाना नेहरू कॉलोनी क्षेत्र में जमीन बेचने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी के दो मामले दर्ज किए गए हैं। पहले मामले में सर्वे ऑफ इंडिया से सेवानिवृत्त जयकृत सिंह से अजबपुर कला में जमीन दिलाने के नाम पर 63 लाख रुपये की ठगी की गई।

आरोपी रजिस्ट्री टालता रहा और बाद में उसके कई मामलों में वांछित होने की जानकारी सामने आई। दूसरे मामले में केदारपुरम निवासी कैलाश चंद जोशी से 33 लाख 44 हजार रुपये लेकर जमीन किसी और को बेच दी गई। दोनों मामलों में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

उधर रामनगर में गर्जिया देवी मंदिर दर्शन को जा रहे मुरादाबाद के युवकों को भाजपा स्टीकर लगी कार में अवैध हूटर लगाकर रौब दिखाना महंगा पड़ गया। भवानीगंज क्षेत्र में चेकिंग के दौरान पुलिस ने कार को रोका और नियमों के उल्लंघन पर ₹2000 का चालान किया।

साथ ही कार से अवैध हूटर उतरवाकर जब्त कर लिया गया। पुलिस ने साफ किया कि कानून सभी के लिए समान है और किसी भी तरह की वीआईपी संस्कृति या राजनीतिक दबाव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इन तीनों घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि उत्तराखंड में जहां एक ओर वन्यजीवों से ग्रामीणों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, वहीं शहरी इलाकों में ठगी और नियम उल्लंघन पर सख्ती भी जरूरी है।

प्रशासन और पुलिस के सामने कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी पहले से कहीं अधिक अहम हो गई है।