विशेष रिपोर्ट: उत्तराखंड में मानव–वन्यजीव संघर्ष और पर्यावरण अपराध। ग्रामीणों में दहशत, वन विभाग अलर्ट

उत्तराखंड में मानव–वन्यजीव संघर्ष और पर्यावरण अपराध। ग्रामीणों में दहशत, वन विभाग अलर्ट

देहरादून। उत्तराखंड के अलग-अलग इलाकों से सामने आई घटनाओं ने एक बार फिर मानव–वन्यजीव संघर्ष और पर्यावरण संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कहीं आबादी में घुसा टस्कर हाथी ग्रामीणों के लिए खौफ का कारण बना, तो कहीं भालू के हमले से किसानों की आजीविका संकट में है। वहीं मसूरी में भू-माफियाओं द्वारा रातों-रात बहुमूल्य पेड़ों की कटाई ने प्रशासन की सख्ती की परीक्षा ले ली है।

रामनगर के टेड़ा गांव में देर शाम उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक टस्कर हाथी आबादी से सटे खेतों में आ गया। हाथी को देखकर ग्रामीण घरों से बाहर निकल आए और जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने मशालें जलाकर और तेज आवाजें कर हाथी को भगाने का प्रयास किया। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और ग्रामीणों की मदद से हाथी को जंगल की ओर खदेड़ा गया, जिसके बाद लोगों ने राहत की सांस ली।

ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों का गांव की ओर आना कोई नई बात नहीं है। आए दिन जंगली हाथियों की आवाजाही से हमेशा खतरा बना रहता है।

पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य जयपाल रावत के अनुसार, हाल ही में इसी हाथी ने जंगल में लकड़ी लेने गई एक महिला पर हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया था। इस घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है और लोग शाम ढलते ही घरों में कैद होने को मजबूर हैं।

इसी क्रम में रामनगर वन प्रभाग की कोसी रेंज के अंतर्गत टेड़ा गांव की 43 वर्षीय सीमा देवी पर जंगल में लकड़ी लेने के दौरान हाथी ने हमला कर दिया। हाथी ने महिला को सूंड से उठाकर जमीन पर पटक दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई।

घायल महिला ने बताया कि हाथी के पल भर के लिए मुड़ते ही वह किसी तरह घिसटते हुए जान बचाने में सफल रही। ग्रामीणों की मदद से उसे रामनगर के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका उपचार जारी है। वन विभाग ने हाथी की निगरानी बढ़ा दी है और ग्रामीणों से जंगल में अकेले न जाने की अपील की है।

उधर, जनपद की केदारघाटी में भालू का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। जंगल से निकलकर भालू गांवों की गोशालाओं में घुस रहे हैं और मवेशियों पर हमला कर रहे हैं।

बीती रात पाब–जगपुड़ा गांव में एक भालू ने गोशाला का दरवाजा तोड़कर अंदर घुसकर बैल पर हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। इस घटना से किसानों में भारी रोष और भय व्याप्त है, क्योंकि मवेशी ही उनकी आजीविका का मुख्य साधन हैं।

वहीं, मसूरी में भू-माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद नजर आए कि उन्होंने वन कानूनों को खुलेआम चुनौती दे दी। कंडी लॉज हालोक रोड, कंपनी गार्डन के समीप रातों-रात सात बहुमूल्य और संरक्षित पेड़ों को अवैध रूप से काट दिया गया।

सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम रेंजर अधिकारी महेंद्र चौहान के नेतृत्व में मौके पर पहुंची और कटे हुए पेड़ों के अवशेष, लकड़ी व औजार जब्त किए।

जांच में सामने आया कि भूमि स्वामी हरप्रीत सिंह, निवासी जीएमएस रोड, ने बिना अनुमति खाखसी, कौल, मंसूरा और भमोरा जैसी प्रजातियों के पेड़ कटवाए थे।

वन विभाग ने भारतीय वन अधिनियम, 1927 के तहत संबंधित भूमि स्वामी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। मौके पर निर्माण की नीयत से खोदे गए 11 गड्ढों को भी तत्काल भरवा दिया गया है।

रेंजर अधिकारी महेंद्र चौहान ने साफ कहा कि मसूरी जैसे संवेदनशील पर्यावरणीय क्षेत्र में किसी भी तरह की अवैध कटाई या निर्माण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

एक तरफ ग्रामीण इलाकों में बढ़ता मानव–वन्यजीव संघर्ष लोगों की जान पर भारी पड़ रहा है, तो दूसरी ओर पहाड़ी क्षेत्रों में पर्यावरण के साथ खिलवाड़ भविष्य के लिए खतरे की घंटी है।

इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वन विभाग और प्रशासन को न केवल सख्ती, बल्कि सतत निगरानी और दीर्घकालिक समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है, ताकि इंसान और प्रकृति के बीच संतुलन बना रह सके।