सरकारी अस्पताल में दलालों का राज! सफेद कोट के पीछे काला धंधा, मरीजों की जिंदगी से सौदेबाजी
रिपोर्ट- सलमान मलिक
रुड़की। क्या सरकारी अस्पताल अब इलाज का भरोसा नहीं, बल्कि दलालों की कमाई का अड्डा बनते जा रहे हैं? रुड़की से सामने आ रही तस्वीरें और आरोप स्वास्थ्य विभाग के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
आरोप है कि सरकारी अस्पताल में कुछ डॉक्टरों और कर्मचारियों की मिलीभगत से एक संगठित दलाली सिंडिकेट सक्रिय है, जो गरीब और गंभीर मरीजों की मजबूरी को मुनाफे में बदल रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, जैसे ही कोई गंभीर हालत में मरीज सरकारी अस्पताल पहुंचता है, उसे इलाज की जगह डर और असहायता का सामना करना पड़ता है। मरीज और उसके तीमारदारों को बताया जाता है कि यहां सुविधाओं की कमी है, इलाज संभव नहीं है और तत्काल रेफर करना जरूरी है। इसी डर के माहौल में खेल शुरू होता है—रेफरल का।
रेफर होते ही अस्पताल परिसर में खुलेआम घूम रहे दलाल सक्रिय हो जाते हैं। एम्बुलेंस के जरिए मरीजों को सीधे उन निजी अस्पतालों में ले जाया जाता है, जो मानकों पर खरे नहीं उतरते।
आरोप है कि इन तथाकथित निजी अस्पतालों में न तो पर्याप्त डॉक्टर होते हैं और न ही जरूरी संसाधन, लेकिन मरीज से मोटी रकम वसूली जाती है। यहां इलाज से ज्यादा मरीज की जेब और जिंदगी दोनों खतरे में पड़ जाती हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह सब कुछ अक्सर रात के अंधेरे में बेखौफ होकर किया जा रहा है। सवाल यह उठता है कि आखिर सरकारी अस्पताल परिसर में दलालों की खुलेआम मौजूदगी कैसे संभव है? क्या स्वास्थ्य विभाग को इन गतिविधियों की जानकारी नहीं है, या फिर सब कुछ जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है?
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि शहर में ऐसे कई निजी अस्पताल और नर्सिंग होम हैं, जो बिना मानकों के संचालित हो रहे हैं, फिर भी उन पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं होती। इससे यह संदेह और गहरा जाता है कि कहीं न कहीं सिस्टम की मौन सहमति इस पूरे खेल को संरक्षण दे रही है।
रुड़की की यह स्थिति डराने वाली है। एक ओर सरकार बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और आम जनता को इलाज की गारंटी देने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर सरकारी अस्पताल में दलालों का यह मकड़जाल उन दावों को खोखला साबित कर रहा है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या हरिद्वार का स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है, या फिर समय रहते इस ‘मौत के कारोबार’ पर लगाम लगेगी?
फिलहाल जरूरत इस बात की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और सरकारी अस्पतालों को फिर से आम आदमी के भरोसे का केंद्र बनाया जाए। वरना गरीब मरीज इसी तरह दलालों और फर्जी अस्पतालों की भेंट चढ़ते रहेंगे।



